

Mominpura Textile Recycling Business: जिसे आमतौर पर कपड़ा सिलने के बाद वेस्ट समझकर फेंक दिया जाता है, वही मामूली 'कतरन' आज नागपुर के मोमिनपुरा और आसपास के इलाकों में हजारों परिवारों के लिए स्वावलंबन और सम्मान की नई कहानी लिख रही है।
होजरी कपड़े के क्षेत्र में देश के बड़े टेक्सटाइल हब कहलाने वाले तमिलनाडु के तिरुपुर शहर से खारिज होने वाली कतरन को तराश कर किफायती वस्त्र तैयार करने का यह हुनर आज नागपुर के मध्य में आबाद मोमिनपुरा को एक अनोखे वस्त्रोद्योग की पहचान दिला रहा है।
प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को जमीन पर उतारता यह कुटीर उद्योग न केवल वेस्ट मैनेजमेंट की बेहतरीन मिसाल है बल्कि हजारों परिवारों के चूल्हे भी रोशन कर रहा है।
नागपुर की गलियों से देश भर में फैला नेटवर्क कतरन से कमाई का यह उद्योग नागपुर के मोमिनपुरा क्षेत्र में पिछले करीब 30 वर्षों से लगातार फल-फूल रहा है। तमिलनाडु के तिरुपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहरों की होजरी फैट्रियों से कतरन नागपुर लाई जाती है।
इस कतरन का इस्तेमाल कर स्थानीय स्तर पर बच्चों के लिए टी-शर्ट, पैजामा, अंडरवियर और किड्स वियर तैयार किए जाते है। इसके दाम भी बेहद कम होते हैं। इस वजह से खसतौर पर छोटे शहरों में इसकी खपत ज्यादा होती है।
आज हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, लुधियाना, अमरावती, सूरत, नांदेड़, बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना सहित देशभर में इस व्यवसाय का नेटवर्क फैला हुआ है। स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि मोमिनपुरा इसका मार्केट बन चुका है और यहां पर देश के अलग-अलग शहरों से खुदरा व्यापारी माल खरीदने आते हैं।
मिसाल अकेले मोमिनपुरा और आसपास के इलाकों में 2,000 से 2,500 महिलाएं इस काम से जुड़ी हुई है। शहर में लगभग 50-60 बड़े व्यापारी है जो कतरन से कपड़ा तैयार करा रहे है। होजरी के कपड़े तैयार करने का काम प्रमुख रूप से महिलाएं ही करती हैं।
इससे महिलाओं को नियमित सिलाई का काम मिल जाता है। घर-गृहस्थी और पढ़ाई संभालने के साथ-साथ युवतियां भी इस काम को करके रोजाना 300 से 600 रुपये तक आसानी से कमा लेती हैं।
इस कतरन से बने कपड़े मात्र 10, 15, 20 रुपये में बेहद किफायती दर पर तैयार होकर बिकते हैं। कम कीमत के बावजूद बड़े पैमाने पर मांग होने के कारण यह कारोबार सालाना करोड़ों रुपये के बैंक टर्नओवर के साथ चल रहा है। पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए यह मॉडल फायदेमंद है जो बेकार कपड़े को एक उपयोगी और किफायती बाजार उत्पाद में बदल देता है।
करीब 30 साल पहले एक राहगीर के रूप में मिले दक्षिण के एक अन्नाजी ने बताया था कि तमिलनाडु के तिरुपुर में होजरी की फैट्रियों से निकलने वाली कतरन से यहां कमाई की जा सकती है। तब से ही यह काम शुरू कर दिया।
आज कई ऐसे लोग जो कभी ऑटो ड्राइवर हुआ करते थे वे भी इस काम से अपना बड़ा कारोबार चला रहे हैं। इस काम से करीब ढाई हजार महिलाओं को घर पर ही नियमित काम मिल रहा है। सरकार को इसे संवारने के लिए सुविधाएं मुहैया करनी चाहिए।
-हाजी मो. वकील, इस काम की शुरुआत करने वाले व्यापारी