Nagpur: जलवाहिनियों से जुड़ी सीवेज की नालियां, विधायक की चेतावनी, मशक्कत के बाद सुचारु हुई जलापूर्ति

Nagpur News: नागपुर में कई दिनों से दूषित पानी को लेकर हंगामा मचा हुआ था। जांच के बाद पता चला कि पीने के पानी की पाइपलाइन से सीवेज की नालियां जुड़ी है। इसके बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
Nagpur News: नागपुर में कई दिनों से दूषित पानी को लेकर हंगामा मचा हुआ था। जांच के बाद पता चला कि पीने के पानी की पाइपलाइन से सीवेज की नालियां जुड़ी है। इसके बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
पाइपलाइन सुधार (फाइल फोटो)
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Nagpur News: सीएम के विधानसभा क्षेत्र में दूषित जलापूर्ति का मामला उजागर होते हुए आनन-फानन में मनपा और ओसीडब्ल्यू ने सुधार कार्य की शुरुआत की। सर्वप्रथम समस्या की जांच के लिए पहुंची टीम उस समय हक्की-बक्की रह गई जब उन्हें जलवाहिनियों से जुड़ीं सीवेज की नालियां दिखाई दीं।

सुधार कार्य करने वाली टीमों के अनुसार कई इलाकों में सीवेज की नालियां या तो सीधे तौर पर जल वितरण पाइप लाइनों से जुड़ी हुई हैं या उनके बहुत ही पास हैं जिससे प्रदूषण के सटीक स्रोत की पहचान करना मुश्किल हो गया था। हालांकि पेयजल दूषित होने का स्रोत पता करने में सामान्य से अधिक समय तो लगा किंतु अब लक्ष्मीनगर जोन अंतर्गत स्वावलंबीनगर और दीनदयालनगर में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

उल्लेखनीय है कि प्रतापनगर टंकी से जुड़ी जलवाहिनी में गत 10 दिनों से दूषित जलापूर्ति होने की शिकायत लोगों की ओर से की जा रही थी। इसी मसले को लेकर विधायक संदीप जोशी ने मनपा आयुक्त अभिजीत चौधरी को पत्र भी लिखा था।

आंदोलन की चेतावनी दी थी

स्वावलंबीनगर और दीनदयालनगर के लोगों द्वारा लंबे समय से दूषित पेयजल की शिकायत करने तथा सोशल मीडिया पर इसे वायरल करने के बाद भी समस्या हल नहीं हो पा रही थी। मामला उजागर होने पर विधायक जोशी ने इसे गंभीरता से लिया जिसके तुरंत बाद मनपा आयुक्त से जल्द से जल्द इसमें सुधार करने की मांग की।

यहां तक कि यदि जल्द ही सुधार नहीं किया गया तो मनपा में इन स्थानीय लोगों के साथ आंदोलन करने की चेतावनी भी दी थी। बहरहाल मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रभाव से जांच के लिए टीम को लगाया गया। युद्ध स्तर पर दूषित जलापूर्ति के कारण को खोजकर सुधार कार्य किए गए हैं।

बदल दी 43 मीटर की जलवाहिनी

बताया जाता है कि बहाली प्रक्रिया के दौरान प्रभावित निवासियों को अबाधित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए टैंकरों की व्यवस्था की गई थी जिस स्थान पर जलवाहिनी के पास सीवेज लाइन थी वहां के कुछ हिस्से को ही अलग किया गया। पाइपलाइन के कई हिस्सों को काटकर अच्छी तरह साफ किया गया। कुछ जगहों पर अस्थायी बाईपास की व्यवस्था भी की गई।

अंतत: पडोले चौक से पहली बायीं लेन में एक सीवेज नाले के पास प्रदूषण के स्रोत की पहचान हुई। इससे पानी की पाइप लाइन का लगभग 6 से 11 मीटर हिस्सा प्रभावित हुआ था। सुधारात्मक उपाय के तौर पर 160 मिमी व्यास वाली कुल 43 मीटर पाइपलाइन को पूरी तरह से बदल दिया गया।

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