तमिलनाडु में DMK-कांग्रेस में तकरार, विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर फंसा पेंच, राहुल गांधी नाराज

Tamil Nadu Assembly Elections 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले खटपट की आहट सामने आने लगी है। सत्‍तारूढ़ डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग के मुद्दे पर पेच फंस गया है।
DMK-Congress feud in Tamil Nadu, seat-sharing disputes loom ahead of assembly elections
राहुल गांधी, MK स्टालिन (Image- Social Media)
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Tamil Nadu Assembly Election: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और सत्ता में भागीदारी को लेकर तनातनी फिर उभर आई है। इससे राज्य में इंडी ब्लॉक की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

करीब दो महीनों से कांग्रेस गठबंधन की दोबारा सत्ता में वापसी की स्थिति में सरकार में औपचारिक हिस्सेदारी की मांग कर रही है। 3 दिसंबर को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष M. K. Stalin से मुलाकात की थी, जिससे लगा कि विवाद थम सकता है। लेकिन एक वरिष्ठ कांग्रेस पर्यवेक्षक द्वारा सार्वजनिक रूप से “गठबंधन सरकार” मॉडल की वकालत के बाद मामला फिर गरमा गया।

राहुल गांधी की नाराजगी

डीएमके द्वारा गठबंधन वार्ता के लिए औपचारिक समिति बनाने में देरी से कांग्रेस नेता राहुल गांधी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। 25 जनवरी को दिल्ली में हुई बैठक में उन्होंने डीएमके की उप महासचिव Kanimozhi Karunanidhi से जल्द सीट बंटवारे पर बातचीत शुरू करने को कहा। राहुल ने संकेत दिया कि बिहार जैसी स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए, जहां कांग्रेस को सीमित सीटें मिली थीं। डीएमके ने बाद में घोषणा की कि सहयोगी दलों से बातचीत 22 फरवरी से शुरू होगी।

सरकार में भागीदारी की मांग

कांग्रेस के कई नेताओं जैसे सांसद मणिक्कम टैगोर, ज्योतिमणि, पूर्व सांसद विश्वनाथन और पूर्व टीएनसीसी अध्यक्ष के.एस. अलागिरी ने खुलकर सत्ता में हिस्सेदारी की मांग की है। उनका तर्क है कि लगातार समर्थन के बावजूद कांग्रेस 1967 के बाद से तमिलनाडु में सत्ता का हिस्सा नहीं बन सकी है। डीएमके के मंत्री रघुपाथी और राजकन्नप्पन की कड़ी प्रतिक्रियाओं से कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष और बढ़ा है। 11 फरवरी को मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि “सत्ता साझा करना तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं है,” लेकिन इससे विवाद शांत नहीं हुआ।

क्या है आगे की रणनीति?

इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता याद दिलाते हैं कि 1984, 1991 और 2006 में उल्लेखनीय सीटें जीतने के बावजूद पार्टी सत्ता ढांचे से बाहर रही। 2021 के चुनाव में डीएमके ने 173 में से 133 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने 25 में से 18 सीटें जीतकर बेहतर सफलता दर हासिल की थी।

खबरों के मुताबिक, कांग्रेस इस बार करीब 45 सीटों की मांग कर रही है और युवा नेताओं को ज्यादा अवसर देना चाहती है। साथ ही पार्टी को आशंका है कि असंतोष जमीनी कार्यकर्ताओं को Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) की ओर मोड़ सकता है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि डीएमके पहले छोटे सहयोगी दलों के साथ सीटों का समझौता कर कांग्रेस पर अंतिम चरण में दबाव बनाने की रणनीति अपना सकती है।

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