हिंगना उप-रजिस्ट्रार ऑफिस में रेडी रेकनर दर से कम में पंजीयन, शुरू हुई जांच

नागपुर जिले के हिंगना उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में सर्वे के दौरान जहां 1,300 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति का ब्योरा नहीं देने का खुलासा हुआ है। आयकर विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
Registration at less than ready reckoner rate in Hingna sub-registrar office investigation started
आयकर विभाग (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur News: आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन(आईएंडसीआई) विभाग को नागपुर जिले के हिंगना उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में सर्वे के दौरान जहां 1,300 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति का ब्योरा नहीं देने का खुलासा हुआ है वहीं यह भी पता चला है कि कार्यालय में कई दस्तावेजों की रजिस्ट्री रेडी रेकनर (आरआर) दर से कम पर की गई है। जमीन की कीमत को कम दिखाने के लिए रेडी रेकनर दर जानबूझकर कम दिखाई गई है। इसकी भी गहराई से जांच शुरू कर दी गई है।

सूत्रों ने बताया कि डिजिटल युग में भी किस प्रकार से खेल खेला जा रहा है यह जांच के दौरान पता चला है। अब आईएंडसीआई के अधिकारी फाइलों को खंगालने में लग गए हैं। इस बीच मीडिया में खबरें आने के बाद कई चार्टर्ड अकाउंटेंट सक्रिय हो गए हैं और वे इसे मानवीय भूल बताने की फिराक में लग गए हैं। बड़े सौदे का मामला काफी गंभीर रूप लेता जा रहा है।

जानकारों ने बताया कि वर्तमान दौर में नागपुर शहर में 30 लाख रुपये में 1BHK फ्लैट भी नहीं मिल रहा है। नियम के अनुसार 10 लाख से 30 लाख के बीच की संपत्तियों की रिपोर्टिंग करना भी अनिवार्य है लेकिन विभाग ने इसकी भी जानकारी आईटी विभाग को उपलब्ध नहीं कराई है।

आयकर विभाग इसे काफी गंभीरता से ले रहा है। पैसा बचाने के चक्कर में एनए लैंड को कृषि भूमि बताकर सौदा किए जाने की संभावना जताई जा रही है जो सरकार के साथ धोखाधड़ी ही कही जा सकती है।

सीबीडीटी ने की सराहना

सर्वे की जानकारी सीबीडीटी को मिली तो सीबीडीटी ने इस कार्रवाई की सराहना की है। विभाग को नागपुर सिटी और ग्रामीण में कार्यरत सभी 21 कार्यालयों पर नजर रखने और जांच करने तक को कहा गया है। संभव है जल्द ही सारे के सारे उप-रजिस्ट्रार सर्वे की जद में आ जाएंगे।

थर्ड पार्टी एंट्री

यह भी खबर सामने आ रही है कि रजिस्ट्रार कार्यालय ने डेटा एंट्री के लिए थर्ड पार्टी को नियुक्त किया है। प्रत्येक कार्यालय के लिए अलग-अलग लोग नियुक्त हैं। हिंगना में ‘जैन’ की कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। थर्ड पार्टी कंपनी डेटा एंट्री कर आयकर विभाग को डेटा प्रदान करती है। यह भी संभव है कि विभाग के अधिकारी निजी कंपनी के व्यक्ति के साथ मिलीभगत कर गलत डेटा भेज रहे हों। इस एंगल से भी जांच हो रही है।

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