इस नवरात्रि डागा अस्पताल में हुआ 187 बेटियों का जन्म, परिवारों ने अम्बा-भवानी-दुर्गेश्वरी रखा नाम

187 Daughters Born at Daga Hospital: इस साल नवरात्रि के इन नौ दिनों में कुल 187 घरों में बेटियों के रूप में देवी का आगमन हुआ। परिवारों ने इसे देवी का आशीर्वाद माना और उनका नाम रखा।
187 Daughters Born at Daga Hospital: इस साल नवरात्रि के इन नौ दिनों में कुल 187 घरों में बेटियों के रूप में देवी का आगमन हुआ। परिवारों ने इसे देवी का आशीर्वाद माना और उनका नाम रखा।
बेटी का जन्म (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Daga Hospital: शक्ति और आदिशक्ति के पर्व नवरात्रि के पावन माहौल में डागा स्मृति शासकीय स्त्री अस्पताल में खुशी की लहर दौड़ गई। इस दौरान 187 बेटियों का जन्म हुआ है। इन नन्ही बेटियों को परिजनों ने ‘देवी का प्रसाद’ मानकर सहर्ष स्वीकार किया। एक परिवार ने अपनी बेटी का नाम ‘दुर्गेश्वरी’ रखा है।

अस्पतालों में हर दिन औसतन 30 से अधिक डिलीवरी होती हैं। नवरात्रि के दौरान खासकर जब बेटियां पैदा होती हैं तो उनके माता-पिता की खुशी सातवें आसमान पर पहुंच जाती है। त्योहारों के वक्त जन्म को हमेशा याद रखा जाता है। नवरात्रि के दौरान डागा अस्पताल में 383 माताओं ने बच्चों को जन्म दिया। इनमें से 126 लड़के और 187 लड़कियां रहीं।

शक्ति का संचार

जिस प्रकार नवरात्रि के दौरान मंदिरों में स्थापित देवी की मूर्तियां सुंदर होती हैं उसी प्रकार समाज के विभिन्न स्तरों पर घरों में और लोगों के मन में कुछ सचेतन रूप से और कुछ अचेतन रूप से शक्ति का संचार होता है। दुर्गा केवल पुराणों की देवी नहीं हैं बल्कि वे स्त्री जो घर, दफ्तर और समाज की सभी जिम्मेदारियों को अकेले ही निभाती हैं, वह लड़की जो शिक्षा के लिए समाज के बंद ढांचों को तोड़ती है, वह मां जो अपने बच्चे के भविष्य के लिए दुनिया से लड़ती है और वह लड़की जो अत्याचार, अन्याय और पीड़ा सहकर एक दिन दहाड़ती है- देवी का ही रूप हैं।

अम्बा, भवानी, दुर्गेश्वरी रखा नाम

चांदनी और नीलेश ने अपनी बेटी का नाम ‘दुर्गेश्वरी’ रखा है, जबकि अन्य परिवारों ने ‘भवानी’, ‘अम्बा’, ‘महालक्ष्मी’ जैसे नाम रखे हैं। डिलीवरी होने के बाद रिश्तेदारों को भी घर में ‘देवी’ आने का जानकारी दी। परिजनों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी। दरअसल यह समाज में आये बदलाव का एक प्रतीक है। अक्सर कई परिवारों की इच्छा होती है कि उनके घर बेटा जन्म ले लेकिन अब भेदभाव का दौर खत्म हो गया है। परिजन बेटी हो या बेटा, सहर्ष स्वीकारने लगे हैं।

नवरात्रि के दौरान डागा अस्पताल में 187 लड़कियों का जन्म केवल एक संयोग नहीं बल्कि हमारे समाज के बदलते दृष्टिकोण का प्रतीक है।‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के माध्यम से अब बेटियों के जन्म का स्वागत करने की भावना और भी प्रबल हो गई है। हम जन्म लेने वाली प्रत्येक ‘दुर्गा’ और उसके परिवार को बधाई देते हैं। स्वास्थ्य विभाग उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्ध है।

  • डॉ. दिलीप मडावी, वैद्यकीय अधीक्षक, डागा अस्पताल
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