
प्रीपेड ऑटो बूथ (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur Railway Encroachment: नागपुर स्टेशन के पश्चिमी भाग में यात्री सुविधा के कथित दावे के साथ चलाये जा रहे प्रीपेड ऑटो रिक्शा बूथ को मध्य रेल नागपुर मंडल द्वारा अवैध करार दे दिया गया है। बार-बार मोहलत के बाद भी कथित नागरिक विकास समिति नागपुर मंडल प्रबंधन को संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी।
इसलिए शनिवार रात 12.00 बजे बूथ को सील कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि यह बूथ 2012 से चलाया जा रहा था। मनमाने ढंग से किराया दर तय करने वाला यह बूथ रेलवे की लाखों की जमीन पर कब्जा करके चलाया जा रहा था। दूसरी ओर भारी-भरकम कमाई के बाद भी रेलवे को एक फूटी कौड़ी नहीं दी जा रही थी।
उल्लेखनीय है कि किराया दर को लेकर प्रीपेड बूथ को आरटीओ के अधीन बताने वाली समिति नागपुर मंडल के सहायक वाणिज्य प्रबंधक के नोटिस का उचित उत्तर नहीं सकी। 18 दिसंबर, 2025 को जारी इस नोटिस में लिखा गया है कि मंडल प्रबंधन ने पाया है कि उक्त बूथ पर किराया दर तय करने का आरटीओ से कोई संबंध नहीं है।
इस प्रकार यह पूरी तरह अवैध है। इस बूथ को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए 7 दिन के भीतर खाली करने का आदेश भी दिया गया था। हालांकि इसी समय महाप्रबंधक दौरे के चलते मंडल प्रंबधन की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई थी।
खास बात यह कि वर्षों से रेलवे की लाखों की जमीन पर अतिक्रमण करके बैठे इस अवैध प्रीपेड बूथ के संचालक अंसारी ने पहले दी हुई मोहलत में मंडल प्रंबधन के समक्ष कोई तार्किक कागजात पेश नहीं किये। हालांकि जैसे ही सील करने के लिए 4 जनवरी, 2026 की तारीख तय की गई तो 31 दिसंबर, 2025 को समिति के नाम पर मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर बूथ को पूरी तरह वैध बताने का अधूरा प्रयास किया।
पत्र में बूथ को आरटीओ की अनुमति और संलग्नित साबित करने का प्रयास किया गया। हालांकि आज तक यह बात किसी के समझ नहीं आई कि केन्द्र सरकार के रेलवे विभाग में महाराष्ट्र राज्य का आरटीओ विभाग किसी बूथ की अनुमति देकर किराया दर कैसे तय कर सकता है।
दूसरी ओर समिति को भी रेल परिसर में इस प्रकार के बूथ चलाने की अनुमति देने का अधिकार कहां से मिला। इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है। हालांकि मंडल प्रबंधन का सख्त रवैया देखते हुए समिति ने अवैध बूथ को यात्री सुविधा और सुरक्षा का रोना रोते हुए बचाने का प्रयास किया, लेकिन कोई दलील काम नहीं आई।
उल्लेखनीय है कि प्रीपेड बूथ और इससे जुड़े ऑटो रिक्शा ने रेल परिसर में करीब 10,000 वर्ग फीट की जमीन पर कब्जा जमाकर रखा है। वर्तमान समय में इतनी जगह पर दोपहिया पार्किंग से रेलवे को प्रतिवर्ष 40 लाख रुपये से अधिक की आय हो सकती है। अतिक्रमणकारियों की तरह परिसर में ही कभी यहां, कभी वहां जमे रहते हुए बूथ के बहाने समिति और संचालक अपनी दुकान चलाते रहे।
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हाल ये हो गये कि 450 करोड़ से अधिक की लागत से जारी स्टेशन रीडेवलपमेंट में यह बूथ अड़ंगा बन रहा है। इसके बावजूद ये हटने को तैयार नहीं। अवैध बूथ संचालकों का उम्मीद है कि इसी प्रकार जमे रहे तो रीडेवलपमेंट पूरा होने के बाद परिसर में कहीं न कहीं जगह तो मिल ही जाएगी। इसलिए अंतत: मंडल प्रबंधन को सख्त होना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस बूथ के लिए नागपुर रेलवे अधिकारियों पर कई बार राजनीतिक दबाव डालकर कार्रवाई प्रभावित की जाती रही है। सत्ताधारी पार्टी की एक पूर्व पार्षद और उनके पति के द्वारा पर्दे के पीछे रहते हुए यह बूथ डंके की चोट पर चलाया जा रहा था। शनिवार रात भी बूथ को हटाने के बजाय इसे टीन से घेरकर सील किया गया है।
अब मंडल प्रबंधन स्वयं नोटिस जारी कर इस बूथ को अवैध घोषित कर चुका है। अब इस बूथ को हर हाल में रेल परिसर से बाहर करना मंडल रेल अधिकारियों के लिए नाक का सवाल बन चुका है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो साबित हो जाएगा कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व वाली भारतीय रेलवे अवैध के सामने भी झुक जाती है।






