
Nagpur Political News:नागपुर महानगरपालिका चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Election Results: नागपुर महानगरपालिका चुनाव के नतीजे न केवल भाजपा की प्रचंड जीत के लिए याद किए जाएंगे, बल्कि कई दिग्गज नेताओं के सियासी पतन के कारण भी सुर्खियों में रहेंगे। सत्ता के केंद्रबिंदु माने जाने वाले भाजपा के गढ़ में ऐसे कई चेहरे चुनाव हार गए, जिनकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी।
जहां भाजपा की ओर से इन दिग्गज पूर्व पार्षदों की जीत पक्की मानी जा रही थी, वहीं कांग्रेस ने भी कई पूर्व पार्षदों को दोबारा मैदान में उतारकर किस्मत आजमाई। इसका खामियाजा दोनों दलों को उठाना पड़ा, लेकिन सबसे अधिक नुकसान भाजपा को हुआ, जहां उसके कई कद्दावर नेता चुनावी रण में ढेर हो गए। अपनों की बगावत और भीतरघात ने इन दिग्गजों की विदाई तय कर दी।
भाजपा के एक कद्दावर नेता और पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष, जो पिछले 15 वर्षों से अजेय माने जा रहे थे, उन्हें कांग्रेस के एक युवा चेहरे ने मात दी। हार के पीछे भीतरघात और बार-बार पुराने चेहरों को टिकट देने को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
भाजपा से पूर्व स्थायी समिति सभापति, उपमहापौर और सत्तापक्ष नेता रहे संदीप जाधव, प्रन्यास के ट्रस्टी रहे भूषण शिंगने, पूर्व महापौर सुनील अग्रवाल, महिला एवं बाल कल्याण समिति की सभापति रहीं प्रगति पाटिल, तथा सामान्य प्रशासन समिति के सभापति रहे धर्मपाल मेश्राम जैसे दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा पूर्व पार्षद संगीता गिरे और प्रमोद चिखले को भी पराजय झेलनी पड़ी।
उत्तर नागपुर में रिपब्लिकन पार्टी के कमजोर पड़ने के बाद बसपा को एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। इससे पहले दो बार बसपा ने 10 और 11 सीटें जीतकर आंबेडकरी समाज की उम्मीदें बढ़ाई थीं।
हालांकि, हाल के दिनों में पार्टी के भीतर चली गुटबाजी और आपसी खींचतान ने बसपा को भारी नुकसान पहुंचाया। नतीजतन, 10 सीटों से फिसलकर बहुजन समाज पार्टी इस बार केवल एक ही सीट जीत पाई। एक साथ 9 सीटों की हार को बसपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
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भाजपा और कांग्रेस के बीच चली कड़ी टक्कर के बीच पूर्व स्थायी समिति सभापति एवं वरिष्ठ पूर्व पार्षद आभा पांडे ने अपना गढ़ बचाने में सफलता हासिल की। शहर में यही एकमात्र सीट रही, जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) ने जीत दर्ज की।
प्रभाग 21 से आभा पांडे ने केवल 656 मतों के अंतर से जीत हासिल कर एक बार फिर मनपा में प्रवेश किया। वहीं चार बार के पूर्व पार्षद मनोज सांगोले, भाजपा मंडल अध्यक्ष की पत्नी भाग्यश्री कानतोडे, पूर्व महापौर किशोर डोरले, पूर्व पार्षद संदीप सहारे, सतीश होले, प्रशांत धवड और तानाजी वनवे जैसे दिग्गज अपनी सीटें बचाने में नाकाम रहे।






