Iran Women Protests: ईरान में कट्टरपंथी शासन और महिलाओं पर थोपी गई पाबंदियों के खिलाफ एक नई और अनोखी चिंगारी सुलग उठी है। प्रदर्शनकारी महिलाएं अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरों को खुलेआम आग के हवाले कर रही हैं। यह विरोध 3 साल पहले महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए हिजाब विरोधी आंदोलनों की एक अगली और अधिक आक्रामक कड़ी माना जा रहा है।
ईरान की गलियों और सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इन वीडियो में महिलाएं न केवल अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जला रही हैं, बल्कि उसी जलती हुई तस्वीर की आग से सिगरेट सुलगाती हुई नजर आ रही हैं। जानकारों के अनुसार, यह प्रतीकात्मक विरोध न केवल ईरान की वर्तमान राजनीतिक सत्ता को चुनौती देता है, बल्कि महिलाओं पर लागू किए गए सख्त सामाजिक और धार्मिक नियमों के खिलाफ भी एक सीधा और खुला संदेश है। ईरानी महिलाओं का यह व्यवहार उस गहरे रोष को दर्शाता है जो वे शासन द्वारा थोपी गई पाबंदियों के खिलाफ महसूस कर रही हैं।
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इस मौजूदा विद्रोह को उस बड़े आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है जिसकी शुरुआत 3 साल पहले महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में हुई मौत के बाद हुई थी। उस समय हिजाब के खिलाफ शुरू हुई वह जंग अब एक व्यापक राजनीतिक क्रांति का रूप ले चुकी है। महिलाओं का आरोप है कि ईरान में लोकतांत्रिक मूल्य (Democratic Values) पूरी तरह खत्म हो चुके हैं और उनके स्थान पर कठोर पाबंदियां लगा दी गई हैं। महिलाओं के बीच अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति भारी नाराजगी है क्योंकि वे अब और अधिक पाबंदियों को झेलने के लिए तैयार नहीं हैं।
Iran Women Protests: ईरान में कट्टरपंथी शासन और महिलाओं पर थोपी गई पाबंदियों के खिलाफ एक नई और अनोखी चिंगारी सुलग उठी है। प्रदर्शनकारी महिलाएं अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरों को खुलेआम आग के हवाले कर रही हैं। यह विरोध 3 साल पहले महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए हिजाब विरोधी आंदोलनों की एक अगली और अधिक आक्रामक कड़ी माना जा रहा है।
ईरान की गलियों और सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इन वीडियो में महिलाएं न केवल अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जला रही हैं, बल्कि उसी जलती हुई तस्वीर की आग से सिगरेट सुलगाती हुई नजर आ रही हैं। जानकारों के अनुसार, यह प्रतीकात्मक विरोध न केवल ईरान की वर्तमान राजनीतिक सत्ता को चुनौती देता है, बल्कि महिलाओं पर लागू किए गए सख्त सामाजिक और धार्मिक नियमों के खिलाफ भी एक सीधा और खुला संदेश है। ईरानी महिलाओं का यह व्यवहार उस गहरे रोष को दर्शाता है जो वे शासन द्वारा थोपी गई पाबंदियों के खिलाफ महसूस कर रही हैं।
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