
नीता ठाकरे व लीला हाथीबेड (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Corporation Election Mayor Election: नागपुर महानगरपालिका चुनाव परिणामों के बाद से महत्वपूर्ण पदों को लेकर चल रही संभावनाओं की रेस और इसमें पार्षदों की चल रही उछल-कूद अंतत: सोमवार को थम गई। पार्टी के निर्णय के अनुसार भाजपा की ओर से महापौर पद के लिए नीता ठाकरे और उपमहापौर पद के लिए लीला हाथीबेड का नामांकन पत्र दाखिल किया गया। चूंकि भाजपा के पास 102 पार्षदों का आंकड़ा है। इससे अब इन दोनों की ताजपोशी निश्चित है।
अब 6 फरवरी को होने जा रहे दोनों पद के चुनाव केवल खानापूर्ति भर हैं। हालांकि भाजपा ने नामांकन पत्र दखिल करते हुए ‘आल-वेल’ दिखाने का प्रयास तो किया गया किंतु पदों को लेकर पार्षदों में नाराजगी के सुर का आलम यह रहा कि अंतिम समय में भाजपा को उपमहापौर के पद का प्रत्याशी बदलना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि नागपुर मनपा में महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति सभापति और सत्ता पक्ष नेता पद के लिए नियुक्ति को लेकर 30 जनवरी को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आवास पर बैठक ली गई। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुई इस बैठक में महापौर पद के लिए नीता ठाकरे तथा उपमहापौर पद के लिए महेन्द्र धनविजय और स्थायी समिति पद के लिए संजय बालपांडे का नाम निश्चित किया गया।
नागपुर महानगपालिका महापौर पद के लिए नामांकन दर्ज करतीं नीता ठाकरे (फोटो नवभारत)
बैठक में निर्णय के अनुसार 31 जनवरी को रजवाड़ा पैलेस में तमाम नवनिर्वाचित पार्षदों की बैठक लेकर शहर अध्यक्ष की ओर से महापौर पद के लिए नीता ठाकरे के नाम की घोषणा कर दी गई। इस समय तक महेन्द्र धनविजय का नाम उपमहापौर पद के लिए तय था किंतु अचानक दूसरे दिन राजनीति का चक्र इस कदर घूमा कि वरिष्ठों को भी अपना फैसला बदलना पड़ गया। इसके बाद उपमहापौर पद के लिए नाम बदल दिया गया। धनविजय की जगह संजय बालपांडे को उपमहापौर और स्थायी समिति पद के लिए शिवानी दाणी का नाम तय किया गया।
नागपूर महानगरपालिकेच्या नवनिर्वाचित महापौर, उपमहापौर, भाजप गटनेता आणि स्थायी समिती अध्यक्ष पदी निवड झालेल्या सर्वांचे मनस्वी अभिनंदन. पुढील राजकीय व सामाजिक वाटचालीसाठी खूप खूप शुभेच्छा..!!#DrParinayFuke #BJP4Maharashtra pic.twitter.com/PuokovWd5w — Dr. Parinay Fuke (@Parinayfuke) February 3, 2026
स्थायी समिति के बदले उपमहापौर पद दिए जाने की भनक लगते ही बालपांडे ने यह पद स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। यहां तक कि बिना किसी पद रहने की पेशकश कर दी। बालपांडे की तटस्थता को देखते हुए अंतत: पार्टी ने लीला हाथीबेड को उपमहापौर पद का प्रत्याशी बना दिया।
भाजपा द्वारा पदों को लेकर तय किए जा रहे नामों को लेकर शुरू से ही कई पार्षदों में कानाफूसी शुरू हो चुकी थी। अंदरखाने कुछ नामों का विरोध भी हो रहा था। यह सिलसिला अंत तक जारी रहा किंतु अंतिम क्षणों में भी महापौर और उपमहापौर का पद दक्षिण नागपुर विधानसभा क्षेत्र से ही देने पर सभी पार्षदों को आश्चर्य हुआ। पार्टी के इस फैसले का भले ही पार्षदों की ओर से खुलकर विरोध न किया गया हो किंतु दबी जुबान में पार्षदों का मानना था कि यदि पार्टी को यही करना था तो उत्तर नागपुर में उपमहापौर पद देकर क्षेत्रीय संतुलन बनाया जा सकता था। जिस तरह से पूर्व से सत्ता पक्ष नेता, दक्षिण से महापौर और दक्षिण-पश्चिम से स्थायी समिति सभापति दिया गया तो उत्तर नागपुर से उपमहापौर का पद देकर इसे साधा जा सकता था।
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भाजपा के कुछ पार्षदों का मानना है कि जिस तरह से पदों का बंटवारा हुआ है, वह समझ से परे है। फिर भी अब कुछ समितियां हैं जिनमें परिवहन, दुर्बल घटक, जल प्रदाय, फायर और सामान्य प्रशासन जैसी महत्वपूर्ण समितियां हैं। इन समितियों के सभापति पद को लेकर भी जल्द ही निर्णय होना है। ऐसे में महत्वपूर्ण समितियों की जिम्मेदारी किसे दी जाती है? यह देखने लायक होगा। इसी तरह से 6 फरवरी को होने जा रही विशेष सभा में स्थायी समिति के 16 सदस्यों का निर्णय होना है जिसमें भाजपा की ओर से 11 सदस्यों का चयन होना है। इन 11 में से 1 सदस्य का बतौर सभापति निर्णय हो चुका है। अब 10 सदस्यों में किसका नंबर लगता है? इस पर सभी की नजरें लगी हुईं हैं।






