

NMC Mayor Formula: नागपुर महानगरपालिका में महापौर के आरक्षण को लेकर राज्य सरकार की ओर से भले ही ढाई वर्ष के लिए लॉटरी निकाली गई हो किंतु नागपुर महानगरपालिका में अगले 5 वर्षों में सिटी को 4 महापौर मिलने के संकेत सूत्रों ने दिए। जहां महापौर का कार्यकाल सवा वर्ष का हो सकता है, इसी तर्ज पर उपमहापौर का कार्यकाल भी निर्धारित होगा।
सूत्रों के अनुसार भाजपा प्रणित नागपुर विकास आघाड़ी ने इस तरह का प्रयोग वर्ष 2017 के आम चुनावों के बाद किया था। हालांकि उस समय पहले ढाई वर्ष का कार्यकाल तो तत्कालीन महापौर नंदा जिचकार को दिया गया किंतु बाद के ढाई वर्ष में वरिष्ठ पार्षद रहे संदीप जोशी और वरिष्ठ पार्षद रहे दयाशंकर तिवारी के बीच बांट दिए गए।
संदीप जोशी 22 नवंबर 2019 से 5 जनवरी 2021 तक कुल 1 वर्ष 44 दिनों तक महापौर रहे, जबकि दयाशंकर तिवारी 5 जनवरी से 2021 से 4 मार्च 2022 तक 1 वर्ष 58 दिनों तक मेयर रहे हैं। इसी तरह का फॉर्मूला अब अगले 5 वर्षों में अपनाए जाने की संभावना सूत्रों ने जताई।
जानकारी के अनुसार महापौर और उपमहापौर सहित स्थायी समिति के सभापति और समिति के अन्य सदस्यों के नामों को तय करने के लिए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में बैठक हुई थी। बैठक में नामों पर मंथन करने के बाद वरिष्ठ नेताओं ने आपसी सहमति से तमाम महत्वपूर्ण पदों पर नाम तय किए किंतु महापौर और उपमहापौर का पद सवा वर्ष रखने को लेकर दोनों नेताओं के बीच 2 रुख देखे गए हैं। एक नेता का मानना था कि महापौर और उपमहापौर को उनका पूरा कार्यकाल मिलना चाहिए, जबकि दूसरे नेता का मानना था कि कोई भी पदाधिकारी सिटी के विकास के लिए पार्टी की दिशा को लेकर चलता है। ऐसे में कम समय मिलने के बावजूद उन्हें पार्टी की दिशा पर ही चलना है। यदि सवा वर्ष का कार्यकाल किया जाए तो अधिक पार्षदों को मनपा के महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का मौका मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार कई वरिष्ठ पार्षदों को कोई भी महत्वपूर्ण पद नहीं दिया गया है जिससे भले ही वरिष्ठ पार्षदों में नाराजगी हो लेकिन उन्हें कुछ समितियों के सभापति बनाकर नाराजगी दूर करने का प्रयास किया जाएगा। जानकारों की मानें तो महत्वपूर्ण पद बंट जाने के कारण अब वरिष्ठ पार्षदों ने सामान्य कार्यकर्ता बनाकर पार्टी के भीतर और मनपा में काम करने का मानस जताया है।
उन्होंने किसी भी तरह की समितियों पर पद नहीं देने का मानस भी जताया है किंतु पार्टी का मानना है कि कोई भी पद छोटा या बड़ा नहीं होता है। किसी भी पद पर रहकर लोगों की सेवा की जा सकती है। पार्टी के इस रुख को देखते हुए वरिष्ठ पार्षदों को समितियों पर ही संतुष्ट होना पड़ सकता है।
सूत्रों की मानें तो स्थायी समिति सभापति के लिए भाजपा की ओर से पहली बार की पार्षद शिवानी दाणी का नाम तय किया है। ऐसे में अब वरिष्ठ पार्षदों ने स्थायी समिति में बतौर सदस्य जाने से भी इनकार कर दिया है। इस सूरत में 16 सदस्यीय स्थायी समिति में इस बार अधिकांश रूप से नए पार्षद देखने को मिल सकते हैं। चुनावी परिणामों के अनुसार भाजपा को 102 सीटों पर जीत हासिल हुई है। ऐसे में नियमों के अनुसार 16 सदस्यीय स्थायी समिति में उनके 11 सदस्य होंगे।
स्थायी समिति में सदस्यों के लिए भाजपा का वेटेज 10.80 है। इसी तरह से कांग्रेस का वेटेज 3.60 है। चूंकि यह 3.50 से अधिक है, अत: उन्हें भी 4 सदस्य भेजने का अधिकार होगा। इस तरह से भाजपा और कांग्रेस के मिलाकर कुल 15 सदस्य होते हैं किंतु 16 सदस्यीय समिति का एक स्थान रिक्त होने से एमआईएम के 0.63 वेटेज के अनुसार इस पार्टी को भी एक सदस्य भेजने का मौका मिल सकता है।