
नागपुर जेल बनेगा रिफॉर्म सेंटर (कंसेप्ट फोटो)
Reform Centre for Prisoners: नागपुर सिटी के बीचों बीच स्थित जेल को हटाने के लिए प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जमीन की पहचान और आवंटन में काफी वक्त जाया जा रहा है। जमीन जितनी जल्द मिलेगी, प्रोजेक्ट उतनी तेजी से आगे बढ़ेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए 150 एकड़ जमीन का आवंटन हो चुका है लेकिन जेल प्रबंधन का मानना है कि इतने में जेल का निर्माण नहीं किया जा सकता है।
जेल के लिए कम से कम 250 एकड़ और अधिकतम 300 एकड़ जमीन की डिमांड जेल प्रबंधन ने की है। उल्लेखनीय है कि यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमएसआईडीसी) को सौंपा गया है। इस प्रोजेक्ट का आरंभिक डीपीआर बनाकर एमएसआईडीसी ने जेल प्रबंधन को सौंप दिया है। इसके बाद अतिरिक्त जमीन की मांग की जा रही है।
सूत्रों ने बताया कि 150 एकड़ जमीन के लिए नागपुर महानगर विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) प्रदान कर दी है। जानकारों का कहना है कि इस जमीन से लगकर 60-65 एकड़ जमीन और है। इसे लेने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई है लेकिन इसके लिए अभी तक कोई मंजूरी नहीं मिली है।
इसके अतिरिक्त समीप स्थित 11 एकड़ जमीन और है, जिसकी जरूरत इस प्रोजेक्ट के लिए पड़ेगी। इसके लिए भी एमएसआईडीसी ने एनएमआरडीए को प्रस्ताव दिया है। दोनों जमीनों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। निर्णय जल्द से जल्द हो, यह समय की मांग है, ताकि निर्णम कार्य भी आरंभ हो सके।
एमएसआईडीसी के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, वह 230 एकड़ के हिसाब से किया गया है। 230 एकड़ पर प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर लगभग 2400 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अगर प्रस्ताव को 250 एकड़ या 300 एकड़ में किया किया जाता है, तो यह अनुमान और अधिक बढ़ेगा और यह 3000 करोड़ से अधिक पहुंच सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि इस जेल को जेल के रूप में कम और ‘रिफॉर्म’ (सुधार) सेंटर के रूप में ज्यादा विकसित किया जाएगा। विश्व स्तर का डिजाइन तैयार किया गया है, जहां पर कैदियों के लिए कई सुविधाएं होंगी ताकि वे वहां पर अपने जीवन को गढ़-मढ़ सकें और एक बेहतर इंसान के रूप में निकलें। यहां पर कैदियों के सुधार के लिए वे तमाम सुविधाएं भी होंगी जो उन्हें चाहिए।
इतना ही नहीं, उनके अंदर स्किल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी बनाया जाएगा ताकि बाहर निकलकर वे स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें। वर्तमान जेल 2000 कैदियों की है, जबकि नया जेल 4000 कैदियों के लिए बनाया जाएगा। इन कैदियों के लिए ‘सुधार’ के अवसर के तमाम विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। जहां कैदियों के फिटनेस की सुविधाएं होंगी वहीं कई प्रकार के ‘हुनर’ सीखने का अवसर भी प्रदान किया जाएगा।
यह भी पढ़ें – Budget 2026: कहां गई नागपुर-मुंबई बुलेट ट्रेन? बजट में रेलवे की बड़ी घोषणाएं, पर संतरा नगरी के लिए कुछ नहीं
हैंडीक्राफ्ट से लेकर हैंडलूम और आर्टिजन का प्रशिक्षण भी ले सकते हैं। जेल को पूरी तरह से ‘ग्रीन बिल्डिंग’ के रूप में विकसित करने की योजना है। पढ़ाई के इच्छुक कैदियों को अत्याधुनिक लाइब्रेरी की सुविधा भी मिलेगी। सरकार यह चाहती है कि कैदी जेल के अंदर पश्चाताप करें और कुछ नया सीखकर नये जीवन की शुरुआत कर सकें।
एक ओर पुराने जेल को शिफ्ट किया जाएगा और नया जेल बनेगा, वहीं वर्तमान जेल के शिफ्ट होने के बाद इंटर मॉडल स्टेशन (आईएमएस) के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। वर्तमान जेल 100 एकड़ में है। इसके साथ ही 50 एकड़ में एफसीआई गोदाम परिसर भी है।
दोनों को मिलाकर 150 एकड़ भूखंड में आईएमएस विकसित करने के लिए नए सिरे से डिटेल्स प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने का काम भी एमएसआईडीसी ने शुरू कर दी है। इसका आरंभिक ‘ढांचा’ भी सलाहकार तैयार कर चुके हैं। डिजाइन ऐसा बनाया जा रहा है, जिससे ‘एक भी पेड़’ को बाधित करने की नौबत नहीं आएगी।






