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महाराष्ट्र में आरक्षण रोटेशन पर कानूनी बखेड़ा, HC ने चुनाव आयोग भेजा नोटिस, 3 दिन में मांगा जवाब
- Written By: आकाश मसने
Maharashtra News: महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनावों के लिए सीट आरक्षण रोटेशन के नए नियमों को लेकर विवाद गहरा गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है।

कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Nikay Chunav: महाराष्ट्र में आगामी जिला परिषद चुनावों को लेकर सीट आरक्षण रोटेशन के नये नियमों पर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में पेश किए गए महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति सीटों के आरक्षण का तरीका और रोटेशन के नियम 2025 के नियम 12 को राष्ट्रपाल पाटिल और प्रकाश इवनाते ने बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी।
सोमवार को याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने राज्य के ग्राम विकास विभाग सचिव, राज्य चुनाव आयोग, विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी और जिला परिषद के सीईओ को नोटिस जारी कर 3 दिनों में जवाब दायर करने का आदेश दिया; साथ ही हाई कोर्ट ने शुक्रवार को इस मसले पर अंतिम सुनवाई करने के संकेत भी दिए।
याचिकाकर्ताओं की अधिवक्ता महेश धात्रक ने पैरवी की। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये नये नियम असंवैधानिक, मनमाने और अन्यायपूर्ण हैं क्योंकि ये पिछले आरक्षण रोटेशन को अधूरा छोड़ते हुए 2025 के चुनाव को ‘पहला चुनाव’ मान रहे हैं।
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अनुसूचित जाति के लिए कभी आरक्षित नहीं
विशेषत: 2 याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिका दायर की गई है जिनमें से एक अनुसूचित जाति (SC) और दूसरा अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से है। अनुसूचित जाति के याचिकाकर्ता काटोल तहसील के कचारी (सावंगा) गांव से हैं जो मेटपांजरा और नवनिर्मित रिधोरा के चुनाव क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
याचिकाकर्ता का मानना है कि महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (सीटों के आरक्षण का तरीका और रोटेशन) नियम 1996 के लागू होने के बाद से उनका वार्ड कभी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हुआ। यदि रोटेशन पूरा होता तो 2025 के ज़िला परिषद चुनाव में यह वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होता जिससे उन्हें चुनाव लड़ने और अपने समुदाय को प्रतिनिधित्व दिलाने का मौका मिलता।
23 वर्षों से आरक्षण की प्रतीक्षा
अनुसूचित जनजाति का याचिकाकर्ता ज़िला परिषद के सोनेगांव (निपानी) चुनाव क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव से है। उनका दावा है कि वर्ष 2002 से उनका वार्ड कभी भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित नहीं हुआ।
रोटेशन जारी रहने पर उनके वार्ड को 2025 में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया जाता तो जिससे उन्हें अपने वर्ग का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता। याचिका के अनुसार राज्य सरकार ने 20 अगस्त 2025 को एक अधिसूचना जारी कर नये नियम 2025 प्रकाशित किए हैं जो नियम 1996 का स्थान लेते हैं।
यह भी पढ़ें:- जरांगे ने फिर दिखाई आंख! सरकार को दिया 17 सितंबर का अल्टीमेटम, बोले- कुणबी प्रमाणपत्र…
इन नये नियमों में जानबूझकर नियम 12 शामिल किया गया है जो यह प्रावधान करता है कि इन नियमों के प्रारंभ होने के बाद आयोजित होने वाले आम चुनाव को सीटों के रोटेशन के उद्देश्य से ‘पहला चुनाव’ माना जाएगा।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नया नियम पिछले रोटेशन को बाधित करने और बाधित करने के इरादे से पेश किया गया है जो 1996/2002 से जारी था और पूरा होने के कगार पर था। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार का यह कदम संविधान के अनुच्छेद 243-K और 243-E13 तथा अनुच्छेद 243-D9 के प्रावधानों के सीधे विपरीत है।
अनुच्छेद 243-D के अनुसार, आरक्षण रोटेशन के माध्यम से दिया जाना चाहिए, ताकि आरक्षित सीटों की सभी श्रेणियों को प्रतिनिधित्व मिल सके। नये नियम के लागू होने से अधूरे रोटेशन को छोड़ दिया जाएगा और 2025 के चुनाव को पहले चुनाव के रूप में मानकर आरक्षण प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाएगा।
Maharashtra zilla parishad reservation rotation dispute court
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