नागपुर: महाज्योति में उत्साह से मनाई गई राजमाता जिजाऊ और स्वामी विवेकानंद जयंती

Mahajyoti Nagpur: नागपुर स्थित महाज्योति संस्था में राजमाता जिजाऊ और स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर मिलिंद नारिंगे ने संस्कार, शिक्षा और विचारों को सशक्त राष्ट्र का आधार बताया।
Swami Vivekananda Jayanti
Mahajyoti Nagpur:नागपुर स्थित महाज्योति (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nagpur News: राजमाता जिजाऊ ने छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे आदर्श शासक का निर्माण कर स्वराज्य की मजबूत नींव रखी, वहीं स्वामी विवेकानंद ने संपूर्ण युवा पीढ़ी को आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और मानवता का संदेश दिया। इन दोनों महापुरुषों के विचारों को यदि आज की पीढ़ी अपनाए, तभी सक्षम समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। यह विचार महात्मा ज्योतिबा फुले संशोधन एवं प्रशिक्षण संस्था (महाज्योति) के व्यवस्थापकीय संचालक माननीय मिलिंद नारिंगे ने व्यक्त किए।

सोमवार को नागपुर स्थित महाज्योति संस्था में राजमाता जिजाऊ और स्वामी विवेकानंद की जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत माननीय मिलिंद नारिंगे के हाथों दोनों महापुरुषों की प्रतिमाओं पर पुष्पहार अर्पित कर अभिवादन के साथ हुई। इस अवसर पर महाज्योति के मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी प्रशांत वावगे तथा लेखाधिकारी रश्मी तेलेवार प्रमुख रूप से उपस्थित थीं।

संस्कार और विचार ही सशक्त राष्ट्र का आधार : मिलिंद नारिंगे

मार्गदर्शन करते हुए माननीय नारिंगे ने कहा कि राजमाता जिजाऊ का मातृत्व राष्ट्रनिर्माण की नींव था। वे केवल छत्रपति शिवाजी महाराज की माता ही नहीं थीं, बल्कि स्वराज्य की संकल्पना की प्रेरणास्रोत भी थीं। उन्होंने शिवाजी महाराज में बचपन से ही राष्ट्रप्रेम, न्याय, अनुशासन और लोककल्याण के संस्कार विकसित किए, जिससे एक आदर्श राजा का निर्माण हुआ। स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय युवाओं को आत्मविश्वास, आत्मचेतना और राष्ट्रभक्ति का मार्ग दिखाया। “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” उनका यह संदेश आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने युवाओं से केवल रोजगार तक सीमित शिक्षा न लेकर समाज परिवर्तन की जिम्मेदारी निभाने का आवाहन किया।

महाज्योति संस्था में राजमाता जिजाऊ और स्वामी विवेकानंद जयंती

शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन है। चारित्र्य निर्माण, समानता और मानवता के मूल्यों को अपनाने से ही राष्ट्र सशक्त बन सकता है। राजमाता जिजाऊ का संस्कारयुक्त मातृत्व और स्वामी विवेकानंद का विचारशील दर्शन आज की पीढ़ी के लिए दिशादर्शक है, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।

कार्यक्रम में उपस्थित मान्यवरों ने दोनों महापुरुषों के कार्यों और विचारों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। इस अवसर पर महाज्योति के परियोजना संचालक कुणाल शिरसाठे, परियोजना व्यवस्थापक विकास गडपायले, परियोजना अधिकारी पंकज पचारे, मयूर चव्हाण, विकास तिळगुल सहित महाज्योति के अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं पूर्व विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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