रात की ड्यूटी, मन में डर: नागपुर एम्स में सुविधाओं की कमी; मेस के खाने से लेकर हॉस्टल तक, छात्र परेशान

Nagpur AIIMS Hostel Crisis: नागपुर एम्स में 1550 छात्रों के लिए मात्र 1398 बेड; मेस के खाने में इल्लियां मिलने से मचा हड़कंप। हॉस्टल की कमी के कारण बाहर रहने को मजबूर डॉक्टर सुरक्षा को लेकर चिंतित।
Nagpur AIIMS faces severe hostel shortage & poor food quality. With 1550 students and only 1398 beds, resident doctors are forced to live off-campus, raising safety concerns.
नागपुर एम्स (साेर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur AIIMS Safety Concerns: इसमें कोई संदेह नहीं कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने कम समय में विकास की ऊंचाइयों को छुआ है लेकिन छात्र सुविधाओं को लेकर गंभीरता नहीं बरती जा रही है। हाल ही में स्नातक छात्रों की मेस के भोजन में इल्लियां और कौड़े मिलने की घटना ने गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोजन की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि छात्रों के निवास की भी समस्या गंभीर हो गई है। छात्रों की तुलना में हॉस्टल्स की संख्या कम है। स्थिति यह है कि निवासी डॉक्टरों को भी किराये पर रहना पड़ रहा है।

पुरुष व महिला निवासी डॉक्टरों की ड्यूटी दिन-रात यानी 24 घंटे होती है। उन्हें रात के वक्त भी आना पड़ता है। परिसर में सन्नाटा होने से उनकी सुरक्षा दांव पर लग गई है। एम्स में स्नातक के साथ ही स्नातकोत्तर की सीटें बढ़ती जा रही हैं। अब सुपर स्पेशलिटी विभाग शुरू होने से सुपर स्पेशलिटी में सीटें भी बढ़ी हैं। इस तुलना में विद्यार्थी और निवासी डॉक्टरों को मिलने वाली सुविधा नहीं बढ़ी है।

वर्तमान में एम्स में स्नातक छात्र 700, स्नातकोत्तर 257, सुपर स्पेशलिटी 61, बेचरल ऑफ पैरामेडिकल 50, नर्सिंग 350, इंटर्न 125 सहित कुल संख्या 1550 है जबकि परिसर में मौजूद अलग-अलग हॉस्टल्स की क्षमता 1398 है। इनमें आंदनी गर्ल्स हॉस्टल की क्षमता 133, केशव ब्वॉयज हॉस्टल 144, सरोजनी गर्ल्स हॉस्टल 118, चरक ब्वॉयज हॉस्टल 312, सारस हॉस्टल 156, सुश्रुत ब्वॉयज हॉस्टल 246 और अद्रावल गर्ल्स हॉस्टल की क्षमता 289 है।

रात की ड्यूटी यानी मन में भय का माहौल

नियमानुसार निवासी डॉक्टरों का परिसर में ही रहना अनिवार्य है क्योंकि इनकी ड्यूटी का समय तय नहीं है। इनमें महिला और पुरुष दोनों का ही समावेश है। इमरजेंसी सहित वार्डों में 24 घंटे की ड्यूटी होने से रात के वक्त भी आना-जाना होता है लेकिन अनेक निवासी डॉक्टरों को हॉस्टल में कमरे उपलब्ध नहीं होने से बाहर उन्हें किराये पर रहना पड़ रहा है।

इस हालत में उन्हें रात के वक्त आना-जाना पड़ता है। शहर से दूर होने के कारण नागपुर एम्स परिसर में शाम के बाद से ही सन्नाटा छा जाता है। इस हालत में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। खास बात यह कि पैरामेडिकल छात्रों को हॉस्टल में जगह के लिए कसरत करनी पड़ती है। अधिकांश छात्र निर्धन व मध्यम वर्ग से होने के कारण उन्हें बाहर किराये पर कमरा लेकर रहना मुश्किल हो रहा है।

2 वर्ष से नये हॉस्टल का प्रस्ताव पेंडिंग

संस्थान में अब हर वर्ष स्नातकोत्तर और सुपर स्पेशलिटी की सीटें बढ़ती जाएंगी, प्रशासन की ओर से दो वर्ष पहले नये हॉस्टल का प्रस्ताव परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजा गया था लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिली, अब जब हॉस्टल में जगह कम है तो विभाग प्रमुखों द्वारा बाहर रहने की अनुमति दी जा रही है जबकि निवास की तत्काल व्यवस्था की जानी चाहिए, बाहर रहने की वजह से छात्रों के सामने मेस की समस्या आती है। समय पर भोजन नहीं मिल पाता।

हॉस्टल की प्रवेश क्षमता

क्रम संख्या हॉस्टल का नाम प्रवेश क्षमता
1 आनंदी हॉस्टल 133
2 केशव हॉस्टल 144
3 अद्रावल हॉस्टल 289
4 सरोजनी हॉस्टल 118
5 चरक हॉस्टल 312
6 सारस हॉस्टल 156
7 सुश्रुत हॉस्टल 246
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