गुरु तेग बहादुर का बलिदान आस्था की रक्षा का प्रेरणास्रोत, खारघर में शहीदी समागम में CM देवेंद्र का नमन

Devendra Fadnavis: खारघर में गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी समागम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके बलिदान को आस्था और धर्म की रक्षा का प्रेरणास्रोत बताया।
350वां शहीदी दिवस, गुरु तेग बहादुर बलिदान, Guru Tegh Bahadur martyrdom event
Devendra Fadnavis speech (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Mumbai Hind Di Chadar: नवी मुंबई के खारघर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में ‘हिंद-दी-चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी 350वें शहीदी समागम’ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब के महान बलिदान के कारण ही हम आज अपनी आस्था की रक्षा कर पाए हैं।

सीएम देवेंद्र ने बताया कि यह शहीदी समागम नागपुर, नांदेड और नवी मुंबई इन तीन शहरों में आयोजित किया गया। फडणवीस ने एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब औरंगज़ेब ने गुरु साहिब के पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार पर प्रतिबंध लगाया, तब लक्खी शाह बंजारा जी उनके पार्थिव शरीर को अपने घर ले गए और घर समेत अग्नि को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा, “गुरु साहिब के इस बलिदान ने देश में ऐसी क्रांति जगाई कि औरंगज़ेब कभी अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सका।” महाराष्ट्र सरकार ने गुरु तेग बहादुर साहिब की शौर्यगाथा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया है।

“सेना नहीं थी, पर साहस और सत्य था”

इस मौके पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गुरु साहिब को नमन करते हुए कहा, “धर्म के लिए शीश दिया, पर सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। यही आदर्श आज के भारत को दिशा देता है।” उन्होंने कहा कि 17वीं शताब्दी में जब कश्मीरी पंडितों पर जबरन धर्म परिवर्तन का संकट आया, तब गुरु तेग बहादुर ने दिल्ली के चांदनी चौक में शीश कटवाना स्वीकार किया, लेकिन अन्याय के सामने नहीं झुके। शिंदे ने कहा, “उनके पास सेना नहीं थी, ताज नहीं था, खजाना नहीं था; लेकिन असीम साहस, अटल सत्य और अपार करुणा थी। इसीलिए उन्हें ‘हिंद-दी-चादर’ कहा जाता है।”

6000 गांवों में डिजिटल जनजागृति अभियान

शिंदे ने बताया कि गुरुजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार 6000 से अधिक गांवों में डिजिटल रथों के माध्यम से जनजागृति अभियान चला रही है। उन्होंने महाराष्ट्र और पंजाब के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दौरान बालासाहेब ठाकरे ने मुंबई में सिख समाज की रक्षा के लिए शिवसैनिकों को सड़क पर उतारा था। महाराष्ट्र ने हमेशा बंधुभाव को जीवित रखा है।

समारोह में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, गिरीश महाजन, आशीष शेलार, गणेश नाईक, संजय राठोड़, राज्यमंत्री माधुरी मिसाल तथा सिख धर्मगुरु बाबा हरनाम सिंह खालसा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

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