मिट रहा है इतिहास! लोणार के 15 में से 9 प्राचीन मंदिर जलमग्न, खतरे में झील का दुर्लभ इकोसिस्टम

Lonar Lake Kamalaja Devi Temple: लोणार सरोवर का जल स्तर 20 फीट बढ़ा, 1200 साल पुराने कमलजा देवी सहित 9 मंदिर जलमग्न। हाई कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
1,200-year-old temples submerged as Lonar Lake water level rises by 20 feet. High Court issues notice to Govt over ecosystem threat. Urgent action demanded.
बुलढाना का लोणार सरोवर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Historical Heritage: लोणार सरोवर को लेकर हाई कोर्ट द्वारा स्वयं संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में प्रेषित करने के लिए अधि। मोहित खजांची को अदालत मित्र नियुक्त किया गया। अदालत मित्र को दिए आदेश के अनुसार अब लोणार सरोवर को लेकर जनहित याचिका प्रस्तुत की गई।

इस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और तमाम संबंधित विभागों के प्रधान सचिवों को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में जवाब दायर करने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने विश्व प्रसिद्ध लोणार सरोवर के संरक्षण और इसकी प्राकृतिक स्थिति को बहाल करने के संबंध में कड़ा रुख अपनाया है।

20 फीट बढ़ा जल स्तर, मंदिर हुए आधे जलमग्न

कोर्ट में प्रस्तुत याचिका के अनुसार सरोवर का जल स्तर लगभग 20 फीट तक बढ़ गया है जिससे इसके तट पर स्थित प्राचीन विरासत संरचनाओं और मंदिरों को भारी खतरा पैदा हो गया है। विशेष रूप से, लगभग 1,200 साल पुराने कमलजा देवी मंदिर का हिस्सा वर्तमान में पानी में डूबा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 15 प्राचीन मंदिरों में से 9 आंशिक या पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। यदि जल स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो इन ऐतिहासिक धरोहरों को बचाना एक कठिन कार्य होगा।

पारिस्थितिकी तंत्र पर संकट

याचिका में यह भी बताया गया है कि बढ़ते जल स्तर के कारण सरोवर की लवणता और पीएच (pH) स्तर में चिंताजनक गिरावट आई है। लोणार सरोवर अपने विशिष्ट गुलाबी रंग और दुर्लभ सूक्ष्मजीवों के लिए जाना जाता है लेकिन पानी के पतला होने से ये जीव नष्ट हो रहे हैं जिससे सरोवर के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। प्रदूषण और मानवीय हस्तक्षेप के कारण सरोवर की इस दुर्दशा के लिए कई कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

सरोवर में सीवेज

लोणार सरोवर में सीवरेज के पानी का बहाव लगातार जारी है जिसे रोकने में प्रशासन विफल रहा है। वन विभाग द्वारा सरोवर के चारों ओर किए गए व्यापक पौधारोपण से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ गई है जिससे पानी रिसकर झील में जा रहा है। 2025 में हुई भारी बारिश के साथ-साथ अवैध हस्तक्षेप को भी जल स्तर बढ़ने का एक प्रमुख कारण माना गया है।

याचिका में अदालत से प्रार्थना की गई है कि वह IIT बॉम्बे को सरोवर में पानी के अत्यधिक प्रवाह के मूल कारण की पहचान करने वाली अपनी रिपोर्ट जल्द पेश करने का निर्देश दे। इसके अलावा मंदिर और विरासत संरचनाओं को और अधिक डूबने से बचाने के लिए एक ‘आपातकालीन जल निकासी योजना’ लागू करने की मांग की गई है। याचिका में झील के पानी की गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी के लिए एक स्टेशन स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है।

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