लोणार सरोवर पर महासंकट: 20 फीट बढ़ा पानी, डूबे प्राचीन मंदिर; हाई कोर्ट ने 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

Lonar Water Level Rise: लोणार सरोवर पर संकट! 15-20 फीट बढ़ा जल स्तर, प्राचीन कमलजा माता और महादेव मंदिर डूबे। हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान। मछलियों के मिलने से बढ़ा जैव-विविधता का खतरा।
Bombay High Court takes suo motu cognizance as water levels in Lonar Lake rise by 20 feet, submerging ancient temples and threatening the unique ecosystem.
लोणार झील (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Lonar Lake: विश्व प्रसिद्ध लोणार सरोवर के लगातार बढ़ते जल स्तर और इसके कारण डूबती प्राचीन विरासत पर हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया है।

बुधवार को न्या. अनिल किलोर और न्या. राज वाकोडे ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता मोहित खजांची को 'न्यायालय मित्र' नियुक्त किया है। अदालत ने उन्हें अगले 7 दिनों के भीतर एक नियमित जनहित याचिका दायर करने का आदेश दिया है, ताकि इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

प्राचीन मंदिर और विरासत खतरे में

सरोबर के बढ़ते जल स्तर के कारण यहां स्थित कई प्राचीन महादेव मंदिर और दीपमालाएं पानी में पूरी तरह या आंशिक रूप से डूब चुकी हैं। बताया जा रहा है कि जल स्तर में लगभग 15 से 20 फीट की वृद्धि हुई है। विशेष रूप से कमलजा माता मंदिर का ओटा और गर्भगृह पानी में डूब गया है जिससे माता की प्रतिमा का मुख तक जलमग्न होने की स्थिति में है। पिछले 3-4 महीनों में जल स्तर बहुत तेजी से बढ़ा है।

जैव विविधता पर संकट

बेसाल्ट चट्टानों पर उल्कापिंड के गिरने से बनी यह लोणार झील दुनिया का एक दुर्लभ 'मेटियोराइट क्रेटर' है। वर्तमान में झील में 4 मुख्य स्रोतों और कई झरनों से पानी का प्रवाह जारी है लेकिन इस वृद्धि के पीछे का सटीक वैज्ञानिक कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। चिंताजनक बात यह है कि इस खारे पानी की झील में अब मछलियां देखी जा रही हैं जो इसकी मूल जैव विविधता के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती हैं।

सर्वेक्षण की तैयारी

स्थानीय नागरिकों और सरोवर प्रेमियों में बढ़ते असंतोष के बाद प्रशासन हरकत में आया है। सरकार के आदेश पर छत्रपति संभाजीनगर के भूजल विशेषज्ञ प्रो. अशोक तेजनकर और तहसीलदार भूषण पाटिल ने सरोवर का निरीक्षण किया है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही सरोवर का एक विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जाएगा, ताकि बढ़ते जल स्तर के कारणों का पता लगाया जा सके।