नागपुर विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री पर विदेश में नौकरी, वेरिफिकेशन के लिए पहुंचे आरोपी तो हुआ खुलासा

विदेशी कंपनी में नौकरी कर रही एक महिला के नाम पर बनी फर्जी इंजीनियरिंग डिग्री का वेरिफिकेशन करवाने आये 2 लोगों की चोरी पकड़ी गई। पुलिस के आने की खबर मिलते ही एक आरोपी पानी पीने के बहाने फरार हो गया जबकि दूसरे आरोपी को सिक्योरिटी गार्ड ने दबोच लिया।
Jobs abroad based on fake Nagpur University degree
नागपुर विश्वविद्यालय
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नागपुर. विदेशी कंपनी में नौकरी कर रही एक महिला के नाम पर बनी फर्जी इंजीनियरिंग डिग्री का वेरिफिकेशन करवाने आये 2 लोगों की चोरी पकड़ी गई। पुलिस के आने की खबर मिलते ही एक आरोपी पानी पीने के बहाने फरार हो गया जबकि दूसरे आरोपी को सिक्योरिटी गार्ड ने दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी का नाम पुतुरवारी, गुंटूर, आंध्र प्रदेश निवासी रमनकुमार सितारामुलू बंगारू (40) बताया गया जबकि नल्लापाडू, आंध्र प्रदेश निवासी रतनबाबू आनंदराव मेकातोटी (40) फरार हो गया। पुलिस ने कांचरला रोशन कांचरला कोटेश्वर को भी आरोपी बनाया है जिसके नाम से यह फर्जी डिग्री है।

नकली डिजिटल सिग्नेचर, लोगो का उपयोग

दोपहर करीब 3 बजे रमनकुमार और रतनबाबू नागपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग में पहुंचे। उनके पास कांचरला रोशन के नाम से कम्प्यूटर साइंस विषय में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री थी। यह डिग्री वर्ष 2016 की थी। उन्होंने बताया कि रोशन विदेश में नौकरी कर रही है और वहां की कंपनी ने डिग्री वेरिफिकेशन के लिए भेजी है। वेरिफिकेशन के दौरान परीक्षा विभाग को संदेह हुआ कि यह फर्जी हो सकती है। रिकॉर्ड की गहन जांच के दौरान भी ऐसी किसी डिग्री का पता नहीं चला। आरोपियों ने बहुत ही चालाकी से नागपुर विश्वविद्यालय के कुलपति और उपकुलपति के डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग किया था। साथ ही नागपुर विश्वविद्यालय के लोगो को भी फर्जी डिग्री पर लगाया था।

पानी पीने के बहाने भागा साथी

तुरंत ही संबंधित अधिकारियों ने दोनों को बुलाया और पूछताछ शुरू की। इसी बीच रतन को समझ आ गया कि उनकी चोरी पकड़ी गई है। वह पानी पीने के बहाने कमरे से बाहर निकला और फरार हो गया। कुछ देर बाद रमन भी वहां से जाने लगा लेकिन सिक्योरिटी गार्ड ने उसे दबोच लिया। विश्वविद्यालय के परीक्षा व मूल्यांकन विभाग के संचालक प्रफुल मधुकरराव साबले (56) द्वारा पुलिस को सूचना दी गई। कुछ ही देर में पुलिस ने पहुंचकर रमन को हिरासत में ले लिया।

मिला प्रेस कार्ड

विश्वविद्यालय पहुंचकर जब पुलिस ने रमन को हिरासत में लेकर पुछताछ शुरू की। तलाशी लेने पर उसके पास आंध्रप्रदेश के किसी स्थानीय चैनल का प्रेस कार्ड भी मिला। यह प्रेस कार्ड वर्ष 2016 में बनाया था। पता चला कि वह किसी यूट्यूब चैनल पर न्यूज रिपोर्टिंग करता था। वहीं, फरार आरोपी रतन भी पेश से वकील बताया जा रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई। साबले की शिकायत पर रमन, रतन और रोशन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। रतन की तलाश जारी थी।

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