जहरीली हवा और 'केमिकल' वाला पानी, खापरखेड़ा थर्मल पावर स्टेशन बना चनकापुर-चिचोली के लिए काल

Khaparkheda Thermal Power Station: खापरखेडा थर्मल पावर स्टेशन से निकल रहे जहरीले धुएं से गांवों में श्वसन रोग बढ़े, MPCB की लापरवाही पर जन आंदोलन की चेतावनी।
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खापरखेड़ा थर्मल प्लांट (सौजन्य-नवभारत)
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Fly Ash Health Effects: खापरखेडा स्थित थर्मल पावर स्टेशन से निकलने वाला जहरीला धुआं स्थानीय लोगों के लिए बढ़ते स्वास्थ्य संकट का कारण बन चुका है। इस धुएं के प्रभाव से आसपास के गांवों के निवासी गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें आंखों में जलन, सांस की तकलीफ, और लंबे समय में श्वसन रोगों का खतरा शामिल है।

यह प्रदूषण विशेष रूप से एलर्जी और अस्थमा जैसी श्वसन समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है, जिससे अब 'श्वसन रोग' एक नई सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। स्थानीय समाजसेवी सुनीता घेर ने इस गंभीर समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय अधिकारी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) इसके समाधान में नकारा रहे हैं।

खतरे में ग्रामवासियों की जान

घेर ने आरोप लगाया कि खापरखेडा पावर स्टेशन के अधिकारियों के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस मामले को हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उनके अनुसार, खापरखेडा थर्मल पावर स्टेशन के चिमनी और कोयला हैंडलिंग विभाग से निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास के क्षेत्रों, विशेषकर चिचोली और चनकापुर जैसे गांवों में अत्यधिक प्रदूषण का कारण बन रहा है।

ग्रामवासियों को यह धुआं उनके जीवन को खतरे में डाल रहा है, और अब हवा, पानी और मृदा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो चुकी है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस पावर स्टेशन की स्थापना के समय ग्रामवासियों ने प्रदूषण नियंत्रण के उपाय सुझाए थे।

लेकिन प्रशासन ने उन पर कोई कदम नहीं उठाया। इसके अलावा, पानी की गुणवत्ता भी अत्यधिक गिर गई है और भूजल में भी मरकरी, आर्सेनिक, एल्यूमिनियम और लिथियम जैसे हानिकारक रासायनिक तत्व मिल गए हैं।

जन आंदोलन करने की चेतावनी

सुनीता घेर ने राज्य सरकार और महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के अधिकारियों से कई बार ज्ञापन दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल उपाय नहीं किए गए तो जन जागरूकता और जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, ताकि इस मुद्दे की गंभीरता को सरकार और संबंधित विभागों तक पहुंचाया जा सके। इस समय खापरखेडा पावर स्टेशन के जहरीले धुएं और प्रदूषण के प्रभावों ने आसपास के गांवों में संकट की स्थिति पैदा कर दी है और इसकी रोकथाम के लिए जल्द कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

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