
विदर्भ एडवांटेज में जीत अदाणी (सौजन्य-IANS)
Jeet Adani Advantage Vidarbha: नागपुर में अदाणी ग्रुप के निदेशक जीत अदाणी ने कहा कि विदर्भ अब केवल संभावनाओं का क्षेत्र नहीं रहा बल्कि यह भारत के लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट की नई धुरी बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। मजबूत नेतृत्व, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग-सरकार की साझेदारी के दम पर विदर्भ अपनी ऐतिहासिक विरासत को आर्थिक और औद्योगिक शक्ति में बदल रहा है।
विदर्भ के औद्योगिक भविष्य की दिशा तय करने वाली परियोजनाओं में उन्होंने लिंगा, कलमेश्वर में प्रस्तावित 70,000 करोड़ के इंटीग्रेटेड कोल गैसीफिकेशन और डाउनस्ट्रीम डेरिवेटिव्स कॉम्प्लेक्स को सबसे अहम बताया। इस परियोजना से 30,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे और नागपुर स्वच्छ ऊर्जा और एडवांस केमिकल उद्योगों के ग्लोबल मैप पर उभरेगा।
एडवांटेज विदर्भ में अदाणी ने कहा कि यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने गोंडखैरी की अंडरग्राउंड माइनिंग परियोजना को जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल खनन का उदाहरण बताया जहां न्यूनतम भूमि उपयोग, शून्य विस्थापन और जल संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। वहीं बोरखेड़ी में 75 एकड़ का आईसीडी और महाराष्ट्र भर में बॉर्डर चेक पोस्ट का अधिग्रहण विदर्भ को एक मजबूत लॉजिस्टिक्स गेट-वे बना रहा है।
उन्होंने कहा कि विदर्भ का नाम ही उसकी पहचान और सामर्थ्य को दर्शाता है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से ज्ञान, संस्कृति और साहस का केंद्र रहा है। नागपुर जो कभी मध्य प्रांत की राजधानी था, आज देश के भौगोलिक केंद्र पर स्थित होकर लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, विमानन और तकनीक का उभरता हुआ हब बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि विदर्भ का यह परिवर्तन अचानक नहीं हुआ बल्कि यह वर्षों की नीतिगत सोच और नेतृत्व का परिणाम है।
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उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और संतुलित क्षेत्रीय विकास पर उनके फोकस ने विदर्भ को निवेश के लिए आकर्षक बनाया है। अदाणी ग्रुप की भूमिका पर बात करते हुए जीत अदाणी ने स्पष्ट किया कि ग्रुप की मौजूदगी विदर्भ में लेन-देन आधारित नहीं बल्कि लॉन्ग टर्म और पीढ़ियों तक चलने वाली प्रतिबद्धता है।
तिरोड़ा में 3,300 मेगावाट का सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट और बूटीबोरी की 600 मेगावाट प्रोजेक्ट के रिवाइवल के जरिए महाराष्ट्र की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूती दी गई है। 25 वर्षों के समझौते के तहत सेलर और थर्मल एनर्जी के मेल से 6,600 मेगावाट की भरोसेमंद बिजली आपूर्ति की जा रही है जो उद्योग, शहरों और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही है।






