ओबीसी जनगणना अभियान का आगाज, 8 फरवरी से होगी शुरुआत, वर्धा से दिल्ली तक गूंजेगी मांग

OBC Caste Census Campaign: राष्ट्रीय ओबीसी मुक्ति मोर्चा का बड़ा ऐलान! 8 फरवरी से वर्धा से शुरू होगा 'ओबीसी जनगणना अभियान'। 2027 की जनगणना में अलग कॉलम न होने पर जताया विरोध।
National OBC Mukti Morcha to launch 'OBC Census Campaign' from Wardha on Feb 8. Demands specific OBC column in 2027 National Census.
जातिगत जनगणना (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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National OBC Mukti Morcha: राष्ट्रीय ओबीसी मुक्ति मोर्चा ने देश में ओबीसी समुदाय की सटीक गणना सुनिश्चित करने के लिए 8 फरवरी से 'ओबीसी जनगणना अभियान' शुरू करने की घोषणा की है। इस अभियान की शुरुआत वर्धा जिले से की जाएगी, जिसके तहत वर्धा और देवली नगर परिषद के अध्यक्षों को निवेदन सौंपा जाएगा। इसके अगले दिन 9 फरवरी को नागपुर महानगर पालिका के नवनिर्वाचित महापौर को भी ज्ञापन दिया जाएगा।

जनगणना 2027 में ओबीसी कॉलम न होने पर आपत्ति

अभियान का मुख्य कारण आगामी 2027 की राष्ट्रीय जनगणना की प्रक्रिया में ओबीसी और जातिगत गणना के स्पष्ट प्रावधानों का अभाव है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 22 जनवरी को जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना के पहले चरण यानी 'घर गणना' के प्रपत्रों में परिवारों की जाति दर्ज करने के लिए कोई अलग कॉलम नहीं है। साथ ही, इसमें 'ओबीसी' शब्द का भी समावेश नहीं किया गया है। संगठन का मानना है कि इससे ओबीसी समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का सही लेखा-जोखा सामने नहीं आ पाएगा।

स्थानीय निकायों के माध्यम से दबाव बनाने की तैयारी

राष्ट्रीय ओबीसी मुक्ति मोर्चा ने इस विसंगति को दूर करने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है। अभियान के तहत हर परिवार के मुखिया से यह आह्वान किया जा रहा है कि जनगणना अधिकारियों को जानकारी देते समय वे वर्गवारी के 'अन्य' कॉलम के सामने अपनी जाति और 'ओबीसी' वर्ग स्पष्ट रूप से दर्ज करवाएं।

संगठन उन ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों और नगरपालिकाओं पर विशेष ध्यान दे रहा है जहां के प्रमुख ओबीसी समुदाय से हैं। इन स्थानीय निकायों के प्रमुखों से निवेदन किया जाएगा कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में जनगणना अधिकारियों को निर्देश दें कि यदि परिवार का मुखिया ओबीसी है, तो उसकी वर्गवारी 'ओबीसी' के रूप में और उसकी जाति अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक प्रभाव

सूत्रों के अनुसार, 1931 के बाद पहली बार 2011 में तत्कालीन सरकार द्वारा सामाजिक और आर्थिक जाति जनगणना कराई गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की गई। वर्तमान अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय विकास की प्रक्रिया में ओबीसी की वास्तविक स्थिति को सामने लाना है।

संगठन का मानना है कि इस अभियान के माध्यम से जनभावनाओं का प्रदर्शन होगा, जिससे सत्ता और राजनीति पर ओबीसी समुदाय का प्रभाव और दबाव बना रहेगा। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संगठन के प्रतिनिधि दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने का प्रयास भी कर रहे हैं।

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