Wildlife: वन वासियों का होगा उद्धार, बोर टाइगर रिजर्व का होगा विस्तार, 5 गांवों का विस्थापन तय!

Bor Wildlife Sanctuary: 25 साल बाद बोर टाइगर रिजर्व के विस्तार को हरी झंडी मिली। इसके विस्तार के लिए 5 गांवों को विस्थापित किया जाएगा। इसमें 1100 से अधिक परिवारों का पुनर्वास तय हैं।
Bor Wildlife Sanctuary: 25 साल बाद बोर टाइगर रिजर्व के विस्तार को हरी झंडी मिली। इसके विस्तार के लिए 5 गांवों को विस्थापित किया जाएगा। इसमें 1100 से अधिक परिवारों का पुनर्वास तय हैं।
बोर टाइगर रिजर्व (सौजन्य-नवभारत)
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Bor Wildlife Conservation: फडणवीस सरकार बनने के बाद से अटके बोर टाइगर रिजर्व के विस्तार ने गति पकड़ ली है। प्रस्ताव राजस्व, वन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है और उप सचिव ने राज्यपाल के नाम एक अधिसूचना जारी कर इस विस्तार को हरी झंडी दे दी है। अधिसूचना के तहत 2,328.12 हेक्टेयर भूमि को वन भूमि में परिवर्तित किया जाएगा और इसमें वर्धा जिले के कारंजा तालुका के 5 गांव मकरसूर, येनीदोडका, उमरविहिरी, मेटहिरजी और गरमसूर शामिल हैं।

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि इन 5 गांवों की निजी भूमि, संरक्षित वन, राजस्व क्षेत्र, सड़कें, नदी-नाले, बस्तियां, झीलें, कब्रिस्तान और बंजर भूमि अब बोर टाइगर रिजर्व में शामिल होंगी। खास बात यह कि पिछले 25 सालों से यहां के ग्रामीण जंगली जानवरों के डर से चैन की नींद नहीं सो पा रहे। इतना ही नहीं, उन्हें जरूरी सुविधाओं के लिए 22 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है।

ग्रामीणों ने पलायन के लिए कई बार जिला कलेक्टर कार्यालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिला। इस अधिसूचना से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है क्योंकि बोर टाइगर रिजर्व की सीमा पर स्थित इन 5 गांवों में अब भयावह हकीकत इतिहास की बात हो जाएगी।

तत्काल स्थानांतरण की मांग

बोर टाइगर रिजर्व के बिल्कुल बीचोबीच माने जाने वाले गरमसूर के ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने के लिए 22 किलोमीटर दूर कोंढाली जाना पड़ता है। पिछले कुछ सालों में मानव-वन्यजीव संघर्ष में 8 ग्रामीणों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोगों के पशुधन जंगली जानवरों ने नष्ट कर दिए हैं। इससे ग्रामीणों में डर का माहौल है और उन्होंने 'बोर बाधित पुनर्वास संघर्ष समिति' का गठन कर तुरंत पुनर्वास की मांग की थी। अब माना जा रहा है कि इस मांग पर अमल होगा।

  • देश का सबसे छोटा बाघ अभयारण्य - 138 वर्ग किमी
  • समृद्ध जैव विविधता और वन्य जीवन बोर की पहचान
  • 2020 में ही विस्तार प्रस्ताव को मंजूरी
  • 2024 में नवीनतम मूल्यांकन के अनुसार 550 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
  • यह अनुमान संपत्ति मूल्य मुआवजे सहित प्रति परिवार 15 लाख रुपये के पैकेज पर आधारित
  • पांच गांवों से 1,122 परिवारों का पुनर्वास
  • परियोजना के लिए अतिरिक्त 24 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का लक्ष्य

वर्धा के कांरजा में गांवों की भूमि (सभी आंकड़े हेक्टेयर में)

गांव कारंजा तहसील निजी क्षेत्र (हेक्टेर में) संरक्षित वन (हेक्टर में) झुड़पी जंगल राजस्व प्रभाग (नदी आबादी) कुल (हेक्टर में)
मकरसूर  266.07 293.03 4.86 14.17 578.13
येनीदोडका 76.50 - 62.27 88.03 227.07
उमरविहीरी 135.95 9.72 3.84 20.28 169.79
मेटहिरजी 385.01 32.90 23.59 102.62 544.12
गरमसूर 484.08 280.14 16.24 28.55 809.01
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