नासिक मनपा चुनाव: 13 दिन शेष, चुनावी खर्च का नहीं दिया हिसाब तो होगी कड़ी कार्रवाई

Nashik Municipal Election: नासिक मनपा चुनाव में 735 में से 72 उम्मीदवारों ने अब तक खर्च का हिसाब नहीं दिया है। 13 दिन शेष हैं, इसके बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Nashik Municipal Corporation elections: 13 days remaining, strict action will be taken if election expenses are not accounted for.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Municipal Election Expenses: नासिक महानगरपालिका चुनाव के मैदान में उत्तरे 735 उम्मीदवारों में से 663 ने अपने चुनावी खर्च का हिसाब चुनाव शाखा को सौंप दिया है। हालांकि, अभी भी 72 उम्मीदवारों ने अपने खर्च का विवरण जमा नहीं किया है। अब हिसाब देने के लिए केवल 13 दिनों की समय सीमा शेष बची है।

निधर्धारित समय में विवरण न देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चुनाव शाखा को प्राप्त जानकारी के अनुसार खर्च का विवरण न देने वालों में राजनीतिक दलों और निर्दलीयों, दोनों का समावेश है।

कुल 526 उम्मीदवारों में से 48 ने अभी तक हिसाब नहीं दिया है। 209 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 185 ने हिसाब दे दिया है, जबकि 24 उम्मीदवारों का विवरण अभी प्रतीक्षित है।

13 लाख की थी सीमा

नासिक महानगरपालिका 'ब' श्रेणी की होने के कारण राज्य चुनाव आयोग ने यहां प्रत्येक उम्मीदवार के लिए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा 13 लाख रुपये निश्चित की थी। आयोग के नियमों और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर खर्च का विस्तृत ब्यौरा संबंधित चुनाव निर्णय अधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और धनबल के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

हो सकती है बड़ी कार्रवाई

यदि कोई उम्मीदवार समय पर हिसाब नहीं देता था गलत विवरण पेश करता है, तो उसे चुनाव विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10-ए के तहत संबंधित उम्मीदवार को अगले तीन वर्षों तक किसी भी चुनाव को लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

गंभीर उल्लंघन के मामलों में दझामक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार गंभीर बीमारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी अनिवार्य विश्वसनीय कारण से हिसाब नहीं दे पाला है, तो उसके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।

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