नागपुर: 33 महीने में सिर्फ पाए खड़े हुए, साहब! केंद्रीय मंत्री के शहर में कछुए की रफ्तार से दौड़ रहा 'केबल स्ट

Nagpur Traffic Jam: नागपुर के अजनी क्षेत्र में ट्रैफिक जाम से लोग परेशान हैं। पुराने रेलवे ब्रिज और धीमी रफ्तार से चल रहे केबल स्टेड ब्रिज प्रोजेक्ट के कारण शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
Only the pylons have been erected in 33 months; the 'Cable-Stayed' bridge in the Union Minister's city is progressing at a snail's pace!
अजनी ब्रिज, केबल स्टेड ब्रिज, नागपुर ट्रैफिक,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Traffic Jam Ajni Bridge: नागपुर शहर में ट्रैफिक जाम अब समस्या कम और 'संस्कार' ज्यादा बन चुका है। सुबह घर से निकलने वाला व्यक्ति अब भगवान से यही प्रार्थना करता है कि अजनी चौक पार हो जाए, बाकी जिंदगी तो जैसे-तैसे कट ही जाएगी। इसका पहला कारण है, अंग्रेजों के जमाने का खस्ता हाल रेलवे ब्रिज। दूसरा है, इसी से लगकर बनाया जा रहा है केबल स्टेड ब्रिज। अग्रेजों के जमाने के ब्रिज को जैसे-तैसे डेटिंग-पेंटिंग करके चलाया जा रहा है। ब्रिज के दोनों और ट्रैफिक के बुरे हाल होते हैं।

दूसरी तरफ, केबल स्टेड ब्रिज जो डेडलाइन बीतने के बाद 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में शहरवासियों के लिए नजर आने वाला 'ड्रीम प्रोजेक्ट' अब 'एंडलेस प्रोजेक्ट' नजर आने लगा है। क्या-क्या बाकी निश्चित तौर पर चलते रेलवे ट्रैफिक के बीच केबल स्टेड ब्रिज बनाना एक चुनौती है लेकिन यह बात भी उतनी ही सही है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा भूमिपूजन के बाद क्लीयरेंस जैसे विषयी पर कोई अड़गा सामने नहीं आया।

रेलवे की ओर से भी रास्ता खुला रखा गया, जबकि यह ब्रिज नागपुर-मुंबई और दक्षिण भारत के लिए जाने वाली ट्रेनों के लिए मेन लाइन है। हैरानी की बात है कि भूमिपूजन के 33 महीनों बाद पावलान तक नहीं बनाये जा सके थे। हालांकि अब निर्माण में तेजी दिख रही है लेकिन इतनी नहीं कि अगले एक वर्ष में भी शहरवासियों को इस केबल स्टेड ब्रिज से वाहन चलाने का अवसर मिले।

वर्तमान में दोनों पायलान पूरे हो चुके हैं और एन्क्रोजेस लगाये जा रहे है। जिन पर केबल कसे जायेंगे। इसी के साथ डेक यानि सड़क का निर्माण किया जायेगा, यह काम भी कल्फी चुनौती भरा होता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी शहरवासियों को कितना लंबा इंतजार करना है।

आखिर कब मिलेगी राहत ?

विडंबना यह है कि शहर का दूसरा 6 लेन केबल स्टेड ब्रिज बनने का सपना अब नागपुरवासियों के धैर्य की परीक्षा बन गया है। जनता को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए लेकिन उससे पहले भरोसा चाहिए कि जो वादा किया गया है वह समय पर पूरा भी होगा, फिलहाल अजनी ब्रिज के नीचे हर दिन वाहनी की लंबी कतारे और लोगों की बढ़ती झुंझलाहट यही पूछ रही है- '36 महीने बीते, और कितना इंतजार?"

रोज का जाम, झुंझलाहट भरी ड्राइविंग

रोजाना हजारों वाहन अजनी चौक घर रेंगते नजर आते हैं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, स्कूल बसें, एम्बुलेंस और मरीज, सब एक ही किस्मत के भरोसे फंसे रहते हैं। पुल पार करने के दौरान वाहन चालकों को डर बना रहता है कि कहीं अभी ना धंस जाये, पहले ही ब्रिज अपनी उम्र पूरी कर चुका है। इसके बाद ब्रिज पर ऊबड़-खाबड़ डामरीकरण और द्विज के दोनों और ट्रैफिक की अजीच सी व्यवस्था माधों पर बल लाने को काफी है। अब तो वाहन चालक यह सोचकर गरता बदल देते हैं कि कहीं अजनी में फंस गए तो पूरा दिन खराब हो जाएगा।

डेड्लाइन बदली भरोसा टूटा

जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में तकनीकी दिक्कतें आ सकती है लेकिन सवाल यह है कि क्या समयसीमा तय करते वक्त इन चुनौतियों का अंदाजा नहीं था? अगर या तो फिर इतनी जल्दबाजी में तारीखे क्यों घोषित की गई? और अगर नहीं था तो क्या बिना पूरी तैयारी के प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया? अब स्थिति यह है कि लोग उद्‌घाटन की तारीख सुनते ही मुस्कुराने लगते हैं। कई नागरिक मजाक में कहते है कि यह पुल पूरा होने से पहले बच्चे बड़े हो जाएंगे।

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