यह जबरन थोपने जैसा... वंदे मातरम पहले गाने के फैसले पर भड़का विपक्ष, सुधीर मुनगंटीवार का पलटवार

Vande Mataram Controversy: वंदे मातरम गाने के सरकार के फैसले पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान। सुधीर मुनगंटीवार ने फैसले का किया समर्थन, तो शरद पवार गुट और कांग्रेस ने उठाए कड़े सवाल।
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सुधीर मुनगंटीवार, नसीम सिद्दीकी और राकेश सिन्हा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Vande Mataram First Singing Decision: भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम गाने के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि इसमें कोई नई बात नहीं है, क्योंकि लंबे समय से विभिन्न कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' का गायन होता रहा है। सुधीर मुनगंटीवार ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि संविधान के अनुसार जन गण मन भारत का राष्ट्रगान है और यह सर्वोपरि है, जबकि संविधान निर्माण के दौरान 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया था।

उन्होंने कहा कि पहले कई आयोजनों में वंदे मातरम का केवल एक अंश गाया जाता था, लेकिन अब इसे पूरा गाया जाना चाहिए। इस विषय का कुछ विशेष धार्मिक समूहों द्वारा विरोध किया जाता रहा है, जबकि देश के लगभग 90 प्रतिशत लोग 'वंदे मातरम' का गायन करते हैं।

राकांपा शरद पवार गुट की आपत्ति

इसी बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सरकार के इस कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार इस फैसले को लोगों पर जबरन थोपना चाहती है। मुसलमान 'वंदे मातरम' नहीं गा सकते, क्योंकि उनकी धार्मिक मान्यता के अनुसार वे केवल एक ईश्वर की इबादत करते हैं और किसी अन्य के सामने सिर नहीं झुका सकते। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय 'वंदे मातरम' का सम्मान करता है, लेकिन उसका गायन करने के बजाय खामोश रहना उचित समझता है।

दोनों ही देश की आत्मा, हर नागरिक करता है गहरा सम्मान

वहीं, कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि भारत का प्रत्येक नागरिक 'जन गण मन' और वंदे मातरम दोनों का गहरा सम्मान करता है। दोनों ही देशभक्ति की भावना से जुड़े हुए हैं और हर भारतीय इन्हें सम्मानपूर्वक गाता है, क्योंकि ये देशवासियों के दिल और दिमाग में गहराई से बसे हुए हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नई गाइडलाइन जारी की गई है तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि राष्ट्रगान जन गण मन को बाद में और वंदे मातरम को पहले गाने का आधार क्या है। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों ही भारत की आत्मा हैं और दोनों के प्रति हर भारतीय के मन में समान सम्मान की भावना है।

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