'फर्जी मतदाता हटाओ, फिर कराओ चुनाव', उद्धव ठाकरे ने भाजपा और चुनाव आयोग पर फिर बाेला हमला

Uddhav Thackeray ने कहा कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव मतदाता सूची में गड़बड़ियां दूर होने के बाद ही हों। भाजपा पर तुष्टीकरण राजनीति का आरोप खारिज किया और पारदर्शी चुनाव की मांग की।
Uddhav Thackeray
उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Uddhav Thackeray Demand For Local Body Elections: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव तभी कराए जाने चाहिए जब मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी न रहे। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा लगाए गए तुष्टीकरण की राजनीति के आरोपों को खारिज कर दिया।

ठाकरे ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में गलतियों को ठीक करना चाहिए, जिसमें डुप्लीकेट और फर्जी नाम शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो शिवसेना (यूबीटी) और न ही किसी दूसरी विपक्षी पार्टी ने धर्म के आधार पर किसी फर्जी मतदाता का जिक्र किया है।

उद्धव ने उठाया युवा मतदाताओं का मुद्दा

उद्धव ठाकरे ने निर्वाचन आयोग पर हमला बोलते हुए दावा किया कि जो लोग एक जुलाई के बाद 18 साल के होंगे, उन्हें वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। यह इसलिए होगा क्योंकि निर्वाचन आयोग ने आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान करने का पात्र होने के लिए एक जुलाई की ‘कट ऑफ’ तारीख तय की है। ठाकरे ने नागरिकों से अपील की है कि वे शिवसेना (यूबीटी) के नजदीकी कार्यालय में जाकर यह पता करें कि उनके नाम मतदाता सूची में सही रूप में दर्ज हैं या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) मतदाताओं की सुविधा के लिए सेंटर खोल रही है।

भाजपा पर साधा निशाना

ठाकरे ने भाजपा नेता आशीष शेलार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि मंत्री ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को स्वीकार न करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अनजाने में 'महाराष्ट्र का पप्पू' कहकर हिम्मत दिखाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर भाजपा के अंदर फूट पड़ गई है।

आशीष शेलार ने उद्धव ठाकरे पर लगाया आरोप

भाजपा नेता आशीष शेलार ने इससे पहले दिन में आरोप लगाया था कि उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं। शेलार ने सवाल किया था कि ये नेता हिंदू मतदाताओं की कई प्रविष्टियां दिखाकर हिंदू-मुस्लिम बंटवारे के बीज क्यों बो रहे हैं, और उन्होंने दूसरे समुदाय के मतदाताओं का नाम लेने से परहेज क्यों किया।

इस पर पलटवार करते हुए ठाकरे ने कहा कि हमने धर्म के आधार पर मतदाता सूची में सुधार के लिए नहीं कहा है। उन्होंने भाजपा को भी चुनौती दी कि अगर भाजपा मतदाता सूची को त्रुटि रहित करने की मांग कर रही है, तो उन्हें अपनी मांगों के साथ हमारे (विपक्षी पार्टियों) साथ निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग का रुख करना चाहिए था।

ठाकरे ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने चुनाव होने से पहले डुप्लीकेट और फर्जी प्रविष्टियों को ठीक करवाने के लिए अदालत जाने का फैसला किया है। उन्होंने निर्वाचन आयोग के सक्षम ऐप और उसके सर्वर को लेकर भी चिंता जताई। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी 2026 तक कराने का निर्देश दिया है।