Ola Uber Strike: ओला-उबर ड्राइवर 7 फरवरी को करेंगे हड़ताल, जानें क्यों होगा मुंबई में चक्का जाम

Ola Uber Strike in Mumbai: मुंबई में 7 फरवरी को ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवरों की हड़ताल रहेगी। गैर-कानूनी बाइक टैक्सी और पैनिक बटन शुल्क के विरोध में यह चक्का जाम बुलाया गया है।
Ola Uber Strike in Mumbai
Ola Uber Strike in Mumbai (फोटो क्रेडिट-X)
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Mumbai Strike Alert: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कल यानी शनिवार, 7 फरवरी को यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) से जुड़े हजारों कैब और ऑटो रिक्शा ड्राइवरों ने एक दिन की राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से गैर-कानूनी बाइक टैक्सी सेवाओं के बढ़ते चलन और ऐप-आधारित कंपनियों की मनमानी किराया नीतियों के खिलाफ है। ड्राइवर संगठनों का आरोप है कि सरकार और परिवहन विभाग उनकी मांगों की अनदेखी कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में 'चक्का जाम' का रास्ता चुनना पड़ा है।

हड़ताल के कारण कार्यालय जाने वाले लोगों, हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।

बाइक टैक्सी और सुरक्षा का मुद्दा

ओला-उबर ड्राइवर की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह अवैध रूप से चल रही बाइक टैक्सी सेवाएं हैं। यूनियनों का दावा है कि ये सेवाएं आधिकारिक रूप से मान्य नहीं हैं, जिससे न केवल उनके व्यवसाय पर असर पड़ रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में है। हाल ही में मुंबई में बाइक टैक्सी से जुड़ी कई दुर्घटनाएं हुई हैं। चूंकि ये वाहन कमर्शियल श्रेणी में पंजीकृत नहीं होते, इसलिए दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को बीमा (Insurance) का लाभ नहीं मिल पाता। ड्राइवरों की मांग है कि इन 'अवैध' सेवाओं पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

पैनिक बटन: ड्राइवरों पर आर्थिक बोझ

हड़ताल का एक और गंभीर कारण पैनिक बटन (Panic Button) उपकरणों से जुड़ा विवाद है। ड्राइवरों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 140 कंपनियों में से महाराष्ट्र सरकार ने लगभग 70 प्रतिशत उपकरणों को अमान्य कर दिया है। इसके चलते हजारों ड्राइवरों को पहले से लगे उपकरण हटाकर नए उपकरण लगाने पड़ रहे हैं, जिसका खर्च करीब 12,000 रुपये तक आ रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि यह उनकी जेब पर अतिरिक्त डाका है और परिवहन विभाग को इस पर लचीला रुख अपनाना चाहिए।

सरकार और कंपनियों के खिलाफ आक्रोश

यूनियनों का कहना है कि ऐप-आधारित कंपनियां ड्राइवरों से मनमाना कमीशन वसूल रही हैं, जबकि ड्राइवरों की कमाई लागत बढ़ने के कारण लगातार घट रही है। परिवहन विभाग ने समय-समय पर निर्देश तो जारी किए, लेकिन धरातल पर कंपनियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। कल होने वाली इस हड़ताल में मुंबई के अलावा ठाणे, नवी मुंबई और पुणे के ड्राइवरों के भी शामिल होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक परिवहन साधनों जैसे बेस्ट बस और लोकल ट्रेन का उपयोग करने की सलाह दी है।

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