संसद में गूंजी विदर्भ के विस्थापितों की पीड़ा; प्रियंका गांधी ने डॉ. पडोले से मिलकर जाना गोसीखुर्द का दर्द

MP Prashant Padole Protest: गोसीखुर्द पीड़ितों के लिए संसद की सीढ़ियों पर बैठे सांसद प्रशांत पडोले। निलंबन के बाद भी जारी है धरना; प्रियंका गांधी ने मुलाकात कर दिया समर्थन।
Suspended MP Dr. Prashant Padole protests at Parliament stairs for Gosikhurd dam victims. Priyanka Gandhi meets him to discuss rehabilitation & compensation.
सांसद प्रशांत पडोले से प्रियंका गांधी ने की भेंट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Gosikhurd Dam Project Victims: भंडारा-लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने गोसीखुर्द बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ संसद परिसर में कड़ा रुख अपनाया। निलंबन की स्थिति में होने के बावजूद उन्होंने लोकसभा की सीढ़ियों पर शांतिपूर्ण धरना देकर केंद्र सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकृष्ट किया। उनका यह कदम यह संदेश देता है कि जनहित के सवालों पर वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

निलंबन भी नहीं रोक सका जनहित की आवाज

गोसीखुर्द राष्ट्रीय परियोजना के कारण हजारों किसान, आदिवासी और सामान्य नागरिक विस्थापित हुए। वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें समुचित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल सकीं। डॉ. पडोले ने धरने के माध्यम से सरकार की उदासीनता पर उंगली उठाते हुए कहा कि पीड़ितों की पीड़ा अब सब्र का बांध तोड़ चुकी है।

उन्होंने कहा कि गोसीखुर्द परियोजना का मुद्दा केवल भंडारा और गोंदिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर के विस्थापितों के दर्द की कहानी बयां करता है। निलंबन के बावजूद उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। जनहित में बोलना उनका अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है और अन्याय के खिलाफ यह लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी।

प्रियंका गांधी से की मुलाकात

इस संदर्भ में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी सांसद पडोले से प्रदर्शन के दौरान भेंट देकर बातचीत की। डॉ. पडोले ने सरकार से मांग की कि परियोजना प्रभावितों के लिए तत्काल विशेष पैकेज घोषित किया जाए। लंबित मुआवजा ब्याज सहित दिया जाए और पुनर्वास से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं तुरंत लागू की जाएं।

उनके इस आंदोलन से संसद परिसर में गोसीखुर्द पीड़ितों का मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया है। यह प्रदर्शन साबित करता है कि जब बात जनता के हक की हो, तो सांसद प्रशांत पडोले आग में घी डालने वाले नहीं, बल्कि सच की मशाल जलाने वाले नेता हैं।

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