
नवी मुंबई की नवनिर्वाचित मेयर सुजाता पाटिल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Navi Mumbai Mayor Election Sujata Patil Win: नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) के महापौर चुनाव का सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को भारतीय जनता पार्टी की सुजाता पाटिल को आधिकारिक तौर पर नवी मुंबई का नया महापौर चुन लिया गया है।, सुजाता पाटिल ने यह जीत निर्विरोध हासिल की है, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी खेमे से किसी ने उनके खिलाफ चुनौती पेश नहीं की। उनके साथ ही बीजेपी के दशरथ भगत को उप महापौर (डिप्टी मेयर) चुना गया है।
इस चुनाव के पीछे पिछले कुछ दिनों से भारी राजनीतिक उठापटक चल रही थी। नवी मुंबई में बीजेपी और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। हालांकि, महापौर पद को लेकर दोनों सहयोगियों के बीच अनबन हो गई थी, जिसके कारण दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए थे। शिवसेना की ओर से सरोज पाटिल ने नामांकन दाखिल किया था, जिससे मुकाबले के दिलचस्प होने की उम्मीद थी। लेकिन मतदान वाले दिन यानी गुरुवार को दोनों गुटों के बीच सुलह हो गई और शिवसेना ने अपनी उम्मीदवार का नाम वापस ले लिया, जिससे सुजाता पाटिल की राह आसान हो गई।
नवी मुंबई में महापौर बनने के लिए किसी भी दल को 66 नगरसेवकों के समर्थन की आवश्यकता थी। आंकड़ों के लिहाज से बीजेपी का पलड़ा पहले से ही भारी था। बीजेपी के पास अपने 65 नगरसेवक थे और एक निर्दलीय पार्षद का भी उन्हें समर्थन प्राप्त था। दूसरी ओर, शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 42 नगरसेवक थे। किसी भी प्रकार की ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ या पार्षदों की खरीद-फरोख्त से बचने के लिए बीजेपी ने बेहद सावधानी बरती। पार्टी ने अपने सभी पार्षदों को एक सुरक्षित होटल में ठहराया था और उन्हें सीधे मतदान के समय ही निगम लाया गया।
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सुजाता पाटिल नवी मुंबई की राजनीति में एक उभरता हुआ चेहरा हैं। वह नेरूल इलाके से दूसरी बार नगरसेविका चुनी गई हैं। उनके पति, सूरज पाटिल, बीजेपी के एक दिग्गज और आक्रामक नेता माने जाते हैं, जो पूर्व मंत्री गणेश नाइक के बेहद वफादार हैं। महापौर के पद पर सुजाता पाटिल की नियुक्ति से क्षेत्र में बीजेपी और गणेश नाइक समर्थकों का दबदबा और मजबूत होने की उम्मीद है। इस जीत के बाद नगर निगम में जश्न का माहौल है, हालांकि डिप्टी मेयर पद के लिए शिवसेना ने पहले आकाश बालकृष्ण माधवी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन अंततः वहां भी बीजेपी के दशरथ भगत ने बाजी मारी।






