अकोला में प्रशासनिक ढिलाई पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, 7.50 करोड़ की मंजूरी के बावजूद सड़कों का काम ठप

Akola Roads News: आगर-उगवा समेत पांच मार्गों के लिए 7.50 करोड़ की निधि मंजूर होने के बावजूद काम शुरू न होने से नाराज ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने बेमियादी अनशन शुरू किया है।
Villagers in Akola are furious over administrative laxity; road and bridge work stalled despite approval of 7.50 crore rupees.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Akola Anti-Corruption Eradication News: तालुका के आगर-उगवा, नागद, सागद, हाता और हातरूण मार्ग के चौड़ीकरण और पुल निर्माण के लिए सरकार ने 7 करोड़ 50 लाख रुपये का निधि मंजूर किया है। लेकिन प्रशासनिक ढिलाई के कारण यह काम अब तक शुरू नहीं हुआ। इससे नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार से जिलाधिकारी कार्यालय के सामने बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है। यह आंदोलन भ्रष्टाचार निर्मूलन समिति के नेतृत्व में किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर तीखी नाराजगी जताई। अनशन मंडप में उन्होंने उलटा घड़ा रखकर उस पर पानी डालकर प्रशासन का विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि प्रशासन से कितनी भी पत्रव्यवहार किया जाए, उसका कोई परिणाम नहीं निकलता। निधि उपलब्ध होने के बावजूद केवल निविदा प्रक्रिया का बहाना बनाकर काम टाला जा रहा है, ऐसा आरोप ग्रामीणों ने लगाया।

पिछले वर्ष जिले में औसत से अधिक वर्षा होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की हालत बेहद खराब हो गई है। आगर-उगवा फाटा मार्ग की स्थिति इतनी दयनीय है कि गड्डों के कारण विद्यार्थियों, मरीजों और बुजुर्गों को यात्रा करना कठिन हो गया है। कुछ दिन पहले ही बालापुर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों ने सड़क समस्या को लेकर सीधे कार्यकारी अभियंता के कार्यालय में धावा बोला था।

जिलाधिकारी को कई बार दिया ज्ञापन

इससे अकोला जिले में सड़क समस्या की गंभीरता स्पष्ट होती है। भ्रष्टाचार निर्मूलन समिति के अध्यक्ष एम.के दिवनाले ने पहले ही जिलाधिकारी और सार्वजनिक निर्माण विभाग को कई बार निवेदन दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि काम शुरू न होने पर अनशन किया जाएगा। लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कदम न उठाए जाने के कारण ग्रामीणों को आंदोलन का सहारा लेना पड़ा।

इस अनशन में समिति अध्यक्ष एम. के दिवनाले के साथ सुमित्रा कात्रे, गोपाल गावंडे, ज्ञानेश्वर शेलके, सिद्धार्थ सिरसाट, किशोर तेलगोटे, पंजाबराव सिरसाट, राजेंद्र काले, विठ्ठल ढगे, विठ्ठल वाघ, डॉ. संतोष ठाकरे सहित क्षेत्र के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक काम की वास्तविक शुरुआत नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।

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