
मुंबई के होटल में मौजूद शिवसेना के पार्षद (सोर्स: साेशल मीडिया)
Maharashtra Politics : मुंबई महानगरपालिका के चुनावी नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘होटल पॉलिटिक्स’ की वापसी हुई है। बांद्रा स्थित एक सात सितारा होटल में ठहरे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नवनिर्वाचित पार्षदों के बीच अब असंतोष के स्वर तेज होने लगे हैं। BMC में सत्ता गठन की रस्साकशी के बीच एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में आंतरिक कलह सामने आ रही है।
शिंदे की शिवसेना ने अपने 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को दलबदल से बचाने के लिए उनके जीत के प्रमाण पत्र और आधार कार्ड अपने पास रख लिए हैं। इस सख्त रवैये और होटल में रहने की अनिवार्यता से नाराज पार्षद अब अपने क्षेत्रों की ओर लौटने लगे हैं।
एकनाथ शिंदे की पार्टी ने जिन दस्तावेजों को अपने पास सुरक्षित रखा है, उनमें 16 जनवरी को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जारी किए गए जीत के प्रमाण पत्र और पार्षदों के आधार कार्ड शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, 17 जनवरी से होटल में रखे गए पार्षद इस पूरी व्यवस्था से घुटन महसूस कर रहे थे। उनका तर्क है कि वे अपनी जीत का जश्न उन मतदाताओं के साथ नहीं मना पा रहे हैं, जिन्होंने उन्हें चुनकर भेजा है। इसी नाराजगी के चलते कई पार्षदों ने अब होटल छोड़ना शुरू कर दिया है।
Mumbai, Maharashtra: Shiv Sena corporators are checking out from Taj Lands End Hotel in Mumbai and heading back to their homes. Out of the 29 Shiv Sena corporators, several checked out last night and have already left, while the remaining are checking out today. The Shiv Sena… pic.twitter.com/YC1PyQ6eeG — IANS (@ians_india) January 20, 2026
शिंदे गुट की इस रणनीति के पीछे नगर निगम कानून का एक तकनीकी पेच है। दरअसल, पार्टी जल्द से जल्द ‘गट’ यानी समूह का गठन करना चाहती है। कानून के अनुसार, आधिकारिक समूह बनने से पहले पार्षद आसानी से दलबदल कर सकते हैं। एक बार गट का पंजीकरण हो जाने के बाद, दलबदल विरोधी कानून लागू हो जाता है, जिसमें केवल दो-तिहाई सदस्यों के टूटने पर ही विभाजन को मान्यता मिलती है। पार्टी का मानना है कि मूल दस्तावेज पास रखने से दलबदल की किसी भी संभावना को फिलहाल टाल दिया गया है।
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बीएमसी की 227 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, शिंदे गुट के 29 पार्षद और भाजपा के पार्षदों को मिलाकर कुल संख्या 118 तक पहुंचती है, जो जादुई आंकड़े को पार कर लेती है। हालांकि, मेयर पद और सत्ता की साझेदारी को लेकर अभी भी पेंच फंसा हुआ है।
ताजा जानकारी के अनुसार, शिवसेना के महासचिव और पूर्व सांसद राहुल शेवाले दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। वे वहां भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से विभिन्न नगर निगमों में गठबंधन के स्वरूप और मेयर पद के संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा करेंगे। फिलहाल शिंदे गुट के भीतर दस्तावेजों को लेकर उपजी नाराजगी ने पार्टी के लिए एक नई चुनौती पेश कर दी है।






