
एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस, अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी (डिजाइन फोटो)
BJP Shiv Sena Mayor Dispute: महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं का चुनाव खत्म होने के बाद अब महायुति में महापौर पद को लेकर महाभारत शुरू हो गई है। खास तौर से बीएमसी के मेयर पद पर कब्जा करने के लिए बीजेपी और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच होड़ मची है।
बीएमसी चुनाव में बीजेपी ने शिंदे सेना से गठबंधन करते हुए 137 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे जबकि शिंदे सेना ने 90 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। बीजेपी को विश्वास था कि वह अपने बल पर 227 सीटों वाली बीएमसी में सत्ता हासिल करने के लिए आवश्यक 114 सीटें हासिल कर लेगी लेकिन उसे सिर्फ 89 सीटें मिलों जबकि शिंदे सेना को 29 सीटों पर सफलता मिली। ऐसे में अब बिना शिंदे के समर्थन के बीजेपी अपना मेयर नहीं बना सकती है।
इसी का फायदा उठाते हुए शिंदे सेना ने अब बीजेपी के सामने अपना महापौर बनाने का दावा पेश कर दिया है। साथ ही किसी भी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग से बचने के लिए शिंदे ने अपने सभी 29 नवनियुक्त पार्षदों को सभी सुविधाओं के साथ फाइव स्टार होटल में कैद कर दिया है। इस वजह से मुंबई की राजनीति में उबाल आ गया है।
मुंबई में शिंदे गुट के कड़े तेवर को देखते हुए बीजेपी ने भी नया गेम शुरू कर दिया है। बीजेपी ने ठाणे में शिंदे गुट से महापौर पद की डिमांड कर दी है। भाजपा विधायक निरंजन डावखरे ने कहा कि हमारी पार्टी को ठाणे में 2 साल के महापौर का पद मिलना चाहिए, नहीं तो हम विपक्ष में बैठेंगे। ठाणे में शिंदे सेना और बीजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। यहां शिंदे सेना ने 75 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी बीजेपी ने 28 सीटें जीतीं।
कल्याण डोंबिवली मनपा में भी मेयर को लेकर पेंच फंस गया है। यहां की 122 सीटों में से शिंदे शिवसेना को 53 और बीजेपी को 50 सीटें मिली हैं। कल्याण डोंबिवली में सरकार बनाने के लिए 62 पार्षदों की जरूरत है। ऐसे में शिंदे सेना और बीजेपी अपना मेयर बनाने के लिए दूसरे दलों के पार्षदों को तोड़ने में लगी हैं।
बीएमसी के अगले मेयर के लिए भाजपा-शिवसेना के बीच टकराव बढ़ सकता है। इसकी वजह यह है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने शिंदे की सेना को झटका देते हुए उनकी उस शर्त को नकार दिया है जिसमे शिंदे ने मेयर पद ढाई-ढाई साल के लिए तय करने का प्रस्ताव दिया था। शिंदे चाहते थे कि मेयर पद ढाई साल भाजपा के पास रहे जबकि ढाई साल यह पद शिवसेना शिंदे के पास रहे।
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भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसा किए जाने पर यह संदेश जाएगा कि भाजपा महाराष्ट्र और मुंबई में शिवसेना शिंदे पर निर्भर है। यही नहीं, इससे भाजपा के मुंबई की सबसे ताकतवर और बड़ी पाटी होने के बाद भी शिंदे के बिना कमजोर होने के संकेत जाने का भी खतरा उत्पन्न होगा जिससे जनता के बीच भाजपा को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बन सकता है। यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व ने शिंदे की शर्त को दरकिनार कर दिया, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने शिंदे को संकेत दिया है कि बीएमसी के नए मेयर के नाम का चयन राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सहमति से होगा।
इसकी वजह यह है कि बीएमसी का चुनाव उनकी ही रणनीति और उनके ही चेहरे पर लड़ा गया। ऐसे में अगर मेयर का चयन उनकी सहमति के बिना किया गया तो इससे गलत संदेश जाएगा। इससे कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल भी बन सकता है, जिससे बचना होगा।






