ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा, निजी कौशल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक विधान परिषद में पारित

Mangal Prabhat Lodha: महाराष्ट्र विधान परिषद में निजी कौशल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पारित हो गया है, जिसके तहत लातूर और पुणे में दो नए कौशल विश्वविद्यालयों को मान्यता दी गई।
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Mangal Prabhat Lodha statement (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Private Skill University Amendment Bill: राज्य में कौशल विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महाराष्ट्र विधान परिषद में निजी कौशल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। इस विधेयक के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के साथ-साथ नए युग की विकासशील कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्किल इंडिया मिशन योजना की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य को “कौशलयुक्त और रोजगारक्षम” बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि नई तकनीकी और औद्योगिक वस्तुओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में स्थायी रूप से स्व-वित्तपोषित निजी कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने की नीति अपनाई गई है, जिसके तहत यह संशोधन विधेयक लाया गया है।

दो नई संस्थाओं को मान्यता

इस विधेयक के तहत ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो निजी कौशल संस्थाओं को आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई है।

पाशा पटेल स्किल टेक यूनिवर्सिटी-लातूर:

यह विश्वविद्यालय मुख्य रूप से पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और उसके समाधान से जुड़े डिग्री तथा पद्धति पाठ्यक्रम संचालित करेगा। इसके अलावा यहां मीडिया मैनेजमेंट, ब्रांडिंग और विज्ञापन क्षेत्र में भी कौशल आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

FUEL स्किल टेक एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी-पुणे:

FUEL संगठन द्वारा संचालित इस विश्वविद्यालय में बैंकिंग और वित्त के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) तथा डिजिटल मार्केटिंग जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों के पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा

इन निजी कौशल संस्थानों की स्थापना से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। उद्योगों की आवश्यकतानुसार अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार कर कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगारोंन्मुख प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे रोजगार के लिए होने वाले पलायन में कमी आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। विधान परिषद में पारित होने के बाद अब यह विधेयक महाराष्ट्र विधान सभा में प्रस्तुत किया जाएगा। विधानसभा से पारित होने के बाद ही इन दोनों संस्थानों के अभियानों का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त होगा।

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