कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा की होगी परख, 30 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

Maharashtra State Women Commission ने सभी जिलाधिकारियों और आयुक्तों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी व निजी कार्यालयों में पॉश एक्ट के तहत गठित समितियों का 1 माह में ऑडिट कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
Rupali Chakankar
रुपाली चाकणकर (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra POSH Act Audit Order: महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने सभी जिलाधिकारियों और संभागीय आयुक्तों को राज्यभर में सरकारी तथा निजी कार्यालयों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों के लिए गठित आंतरिक समितियों का एक माह के भीतर ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।

इस कदम का उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पॉश अधिनियम) का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इस अधिनियम के तहत सभी कार्यालयों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निपटारे के लिए आंतरिक समिति का गठन अनिवार्य है।

जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति का होना भी जरूरी है। आयोग ने कहा कि निरीक्षणों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर कई समस्याएं सामने आईं। इसने कहा कि कई कार्यालयों में आंतरिक समितियां हैं ही नहीं, कुछ समितियां केवल कागजों पर हैं, कानून के बारे में जागरूकता का अभाव है, सदस्यों को प्रशिक्षण नहीं मिला है, वार्षिक रिपोर्ट जमा जांच करने नहीं की जातीं और आवश्यक सूचना/प्रदर्शन बोर्ड भी नहीं लगे हैं। अधिकारियों को यह के लिए कहा गया है कि आंतरिक समितियां सही तरीके से गठित हैं और काम कर रही हैं या नहीं।

30 दिन में सौंपें रिपोर्ट

आयोग के अनुसार, प्रत्येक कार्यालय के लिए एक विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए, जिसमें समिति की संरचना, प्राप्त और लंबित शिकायतें, की गई कार्रवाई, जागरूकता गतिविधियां, वार्षिक रिपोर्ट और प्रदर्शन बोर्ड से जुड़ा विवरण शामिल हो।

यदि किसी कार्यालय ने समिति का गठन नहीं किया है या समिति अधूरी है, तो संबंधित अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि इसका गठन तुरंत किया जाए। कानून का पालन न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। सभी संभागीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को 30 दिन के भीतर महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग को ऑडिट रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल की होगी परख

  • चाकणकर ने कहा कि आयोग ने पहले राज्य सरकार से पॉश ऑडिट अनिवार्य करने का आग्रह किया था और सरकार ने 22 अगस्त 2025 को एक सरकारी आदेश कर इस मांग का समर्थन किया था।
  • इस ऑडिट से यह परखने में मदद मिलेगी कि महाराष्ट्र में कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और संरक्षित कार्य वातावरण मिल रहा है या नहीं।
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