महिला अधिवक्ता को परेशान करना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने जमानत रद्द कर बार काउंसिल को दिए जांच के निर्देश

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला वकील का पीछा करने और परेशान करने के आरोपी अधिवक्ता की अंतरिम जमानत रद्द करते हुए उप्र बार काउंसिल को आरोपी के आचरण की जांच करने का निर्देश दिया है।
Allahabad High Court Cancels Interim Bail of Lawyer Accused of Harassing Woman Advocate, Orders Bar Council Inquiry
इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Allahabad High Court Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महिला वकील का पीछा करने और उसे परेशान करने के आरोपी अधिवक्ता को दी गई अंतरिम जमानत रद्द कर दी है। साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से आरोपी के आचरण की जांच कर यह तय करने को कहा है कि वह वकालत जारी रखने के योग्य है या नहीं। न्यायालय के इस आदेश को अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण और न्यायिक गरिमा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देसवाल की पीठ ने की। अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज है। आरोप है कि वह लंबे समय से महिला वकील का पीछा कर रहा था और बार-बार उसे परेशान करता था। महिला अधिवक्ता ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा।

आरोपी ने अदालत के आदेशों का किया उल्लंघन

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि आरोपी को 16 मार्च को अंतरिम जमानत देते समय कुछ स्पष्ट शर्तों के साथ राहत दी गई थी। इनमें महिला वकील से किसी भी प्रकार का संपर्क न करना, बिना अनुमति हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश न करना और न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश न करना शामिल था। हालांकि, बाद में यह आरोप सामने आया कि आरोपी ने इन शर्तों का उल्लंघन किया और अदालत द्वारा दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया।

न्यायालय ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई अधिवक्ता स्वयं कानून और न्यायालय के निर्देशों का सम्मान नहीं करता, तो यह पेशे की गरिमा के विपरीत है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी ने न्यायालय के समक्ष दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया, जिसके कारण उसकी अंतरिम जमानत जारी रखना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने आरोपी की अंतरिम जमानत निरस्त करते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को उसके आचरण की जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जांच के आधार पर यह तय किया जाए कि संबंधित अधिवक्ता वकालत के पेशे में बने रहने के योग्य है या नहीं। इस आदेश को कानूनी पेशे में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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