मुंबई में स्कूलों के कैंटीन और मिड-डे मील पर FDA की नजर, जंक फूड मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई

FDA Inspection In Mumbai: मुंबई में एफडीए ने स्कूल कैंटीनों और मिड-डे मील केंद्रों की जांच तेज कर दी है। जंक फूड, अस्वच्छ भोजन और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी।
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कार्यवाई करती FDA की टीम (सोर्स: AI)
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FDA Inspection In Mumbai School: विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एफडीए ने मुंबई के निजी स्कूलों के कैंटीनों और मिड-डे मील उपलब्ध कराने वाले किचन शेड की जांच अभियान तेज कर दिया है।

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस अभियान के तहत शिक्षण अधिकारियों, स्कूलों के प्राचार्यों और बचत गटों संचालकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2020 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

जंक फूड पर होगी सख्ती

एफडीए के सहायक आयुक्त पीआर सिंगरवाड ने कहा कि स्कूलों में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और विद्यार्थियों को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना सभी संबंधित संस्थाओं की संयुक्त जिम्मेदारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल कैंटीन या मिड-डे मील केंद्र में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच मुंबई के पश्चिमी उपनगर के दो निजी स्कूलों के कुछ अभिभावकों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर आरोप लगाया कि कैंटीनों में बच्चों को पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं, जो मोटापे और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। हालांकि, इस मामले में संबंधित स्कूलों का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

अधिकारियों का ये हैं कहना

पश्चिम विभाग के शिक्षा निरीक्षक संजय जावीर ने कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई के अधिकार विभाग के पास हैं और स्कूलों में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

वहीं, बीएमसी के निजी शिक्षा विभाग के उप शिक्षा अधिकारी निसार खान ने कहा कि शासन के नियमों के अनुसार स्कूलों में मोटापा बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ नहीं बेचे जाने चाहिए।

अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन शिकायत मिलने पर जांच कर संबंधित स्कूलों को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी।

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