
Husain Dalwai on Madrasa Funding (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Madrasa Funding: मदरसों की फंडिंग और उनके आय के स्रोतों को लेकर जारी राष्ट्रव्यापी बहस में अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई भी कूद पड़े हैं। दलवई ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरते हुए एक बेहद तीखा और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता के नाम पर जांच कर रही है, तो यह केवल मदरसों तक ही सीमित क्यों रहनी चाहिए? दलवई ने मांग की है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और देश के बड़े मंदिरों को मिलने वाले चंदे और फंड की भी उसी गहनता से जांच की जानी चाहिए। इस बयान के बाद महाराष्ट्र सहित देश के राजनीतिक हलकों में चर्चा और तनाव तेज हो गया है।
हुसैन दलवई का यह बयान उस समय आया है जब हाल के दिनों में कई राज्यों में अवैध मदरसों और विदेशी फंडिंग के संदेह में सरकारी सर्वेक्षण और जांच की जा रही है। कांग्रेस नेता ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश करार दिया है।
Mumbai, Maharashtra: Congress leader Hussain Dalwai says, “If you are investigating madrasas, asking where the funds come from-I ask, where does the RSS get its funds from? Look into that too. Where do big temples get their funds? Look into that too. The point is, why talk only… pic.twitter.com/BabHFY6sJz — IANS (@ians_india) February 5, 2026
हुसैन दलवई ने आरोप लगाया कि मदरसों की जांच के पीछे सरकार की मंशा साफ नहीं है और एक खास तबके को समाज में संदिग्ध दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “देश में कई सामाजिक, धार्मिक और वैचारिक संस्थाएं सक्रिय हैं, जिन्हें अलग-अलग स्रोतों से भारी मात्रा में फंड मिलता है। अगर पारदर्शिता की बात की जा रही है, तो यह नियम सब पर समान रूप से लागू होना चाहिए।” दलवई के अनुसार, चयनात्मक जांच (Selective Investigation) लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे समाज में असंतोष पैदा होता है।
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अपने बयान में सीधे तौर पर आरएसएस का नाम लेते हुए दलवई ने पूछा, “आरएसएस को फंड कहां से मिलता है? उसकी भी जांच कीजिए। बड़े मंदिरों को फंड कहां से मिलते हैं? उनकी भी जांच कीजिए। मुद्दा यह है कि सिर्फ मदरसों की ही बात क्यों? सबकी बात कीजिए।” उन्होंने तर्क दिया कि यदि सभी धार्मिक और वैचारिक संगठनों के वित्तीय लेन-देन सार्वजनिक किए जाते हैं, तभी असली निष्पक्षता और जनता का भरोसा कायम रहेगा। उनके इस रुख को विपक्ष द्वारा सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
हुसैन दलवई के इस बयान के बाद भाजपा और हिंदू संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंदिरों और आरएसएस की तुलना मदरसों से करना एक नया विवाद खड़ा कर सकता है, जिससे आगामी चुनावों में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। फिलहाल, मदरसों की जांच का मुद्दा एक बार फिर सियासी केंद्र में आ गया है। जहाँ सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और शिक्षा सुधार से जोड़ रहा है, वहीं दलवई जैसे नेता इसे भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताकर व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं।






