Mumbai: सिग्नल पर भीख नहीं अब मिलेगा रोजगार, सिग्नल शाला बदलेगी वंचित बच्चों का भविष्य

Signal Shala Mumbai: मुंबई के सांताक्रूज-चेम्बूर लिंक रोड पर बीएमसी ने पहला 'सिग्नल स्कूल' शुरू किया है। यहाँ फ्लाईओवर के नीचे वंचित बच्चों को कोडिंग और रोबोटिक्स सिखाया जाएगा।
Signal Shala Mumbai
Signal Shala Mumbai प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
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Santacruz-Chembur Signal Shala: मुंबई की व्यस्त सड़कों और शोर-शराबे वाले फ्लाईओवर के नीचे अब मासूमों का भविष्य संवारा जा रहा है। बीएमसी (BMC) ने सांताक्रूज-चेम्बूर लिंक रोड (SCLR) पर शहर का पहला 'सिग्नल स्कूल' (Signal Shala) शुरू कर एक मिसाल पेश की है। यह पहल उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई है, जो कल तक ट्रैफिक सिग्नलों पर भीख मांगने या छोटे-मोटे सामान बेचने को मजबूर थे।

मेयर रितु तावड़े के विजन और 'समर्थ भारत व्यासपीठ' के सहयोग से शुरू हुआ यह स्कूल "बच्चे स्कूल तक नहीं, बल्कि स्कूल बच्चों तक" के संकल्प को साकार कर रहा है।

फ्लाईओवर के नीचे हाई-टेक क्लासरूम: रोबोटिक्स और कोडिंग की शिक्षा

सिग्नल शाला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिकता है। फ्लाईओवर के नीचे रखे गए रंग-बिरंगे कंटेनरों के भीतर बच्चों को न केवल ककहरा सिखाया जा रहा है, बल्कि उन्हें रोबोटिक्स, कोडिंग और साइंस लैब जैसी हाई-टेक सुविधाएं भी दी जा रही हैं। यहाँ की शिक्षा पद्धति को इस तरह तैयार किया गया है कि ये बच्चे तकनीकी रूप से भी उतने ही सक्षम बनें जितने किसी निजी स्कूल के छात्र होते हैं। पारंपरिक किताबों के साथ-साथ यहाँ कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

आवासीय सुविधा: शिक्षा, भोजन और स्वास्थ्य का संगम

सिग्नल स्कूल सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि एक आवासीय केंद्र (Residential School) की तरह काम करता है। यहाँ आने वाले वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ-साथ पौष्टिक भोजन, साफ कपड़े और नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान की जाती है। सोमवार से शनिवार तक चलने वाले इस स्कूल में शाम के समय स्वयंसेवकों द्वारा संगीत, नृत्य और चित्रकला जैसी मनोरंजक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, ताकि बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास भी हो सके।

बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ एक बड़ा प्रहार

ठाणे के 'तीन हाट नाका' की सफलता के बाद अब मुंबई के सांताक्रूज-चेम्बूर लिंक रोड पर इस मॉडल को उतारना एक बड़ा कदम है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को गरीबी और भिक्षावृत्ति के दुष्चक्र से बाहर निकालकर मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है। साक्षरता दर बढ़ाने और इन बच्चों को एक सम्मानित जीवन देने की दिशा में सिग्नल शाला एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो रही है। यह स्कूल उन अभिभावकों के लिए भी वरदान है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे थे।

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