
आशीष शेलार व अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ashish Shelar Vs Ajit Pawar: महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन में सावरकर विचारधारा को लेकर भाजपा और एनसीपी के बीच टकराव देखा गया। मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि सहयोगी दलों से सावरकर का सम्मान अपेक्षित है, जबकि एनसीपी ने आंबेडकरवादी विचारधारा पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
मंत्री आशीष शेलार ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी विनायक दामोदर सावरकर की विचारधारा का अनुसरण करती है। शेलार ने कहा, “बीजेपी अपने सहयोगियों से भी उनके विचारों का सम्मान करने की अपेक्षा करती है। अगर आप हमारे साथ आते हैं तो हम मिलकर काम करेंगे, अगर नहीं आते तो भी हमारा काम चलता रहेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि महायुति में शामिल सभी सहयोगी दलों के साथ काम करना जारी रहेगा, लेकिन अगर कोई विरोध करता है तो उसका मुकाबला भी किया जाएगा।
एनसीपी नेता अमोल मिटकरी ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अजित पवार और उनकी पार्टी को बीजेपी के वैचारिक नेतृत्व के तहत काम करने की बाध्यता स्वीकार नहीं है। मिटकरी ने लिखा, “हम शिव-शाहू-आंबेडकर आंदोलन के प्रति प्रतिबद्ध थे, हैं और रहेंगे। भले ही हम उस विचारधारा को स्वीकार न करें, जिसे आप चाहते हैं, लेकिन हमारी पार्टी की आंबेडकरवादी विचारधारा को अनदेखा नहीं किया जा सकता।”
पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निकाय चुनाव के दौरान बीजेपी और एनसीपी के बीच यह विवाद सामने आया। अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी ने स्थानीय निकाय प्रशासन में बीजेपी के नेताओं के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी प्रचार और गठबंधन सहयोगियों के बीच वैचारिक मतभेद ऐसे टकराव की संभावना बढ़ाते हैं। बीजेपी की सावरकर नीति और एनसीपी की आंबेडकरवादी प्रतिबद्धता दोनों ही दलों के लिए प्रमुख पहचान बिंदु हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस टकराव का असर महायुति गठबंधन की स्थिरता और आगामी नगर निकाय चुनावों में मतदाताओं की धारणा पर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दोनों दल अपने-अपने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए इस वैचारिक बहस को और तेज कर सकते हैं।






