PCMC Election में बिना गठबंधन BJP-NCP आमने-सामने, 44 सीटों पर सीधी टक्कर
Pune News: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा चुनाव में गठबंधन टूटने से सियासी तस्वीर साफ हो गई है। 128 में से 44 सीटों पर भाजपा और एनसीपी के बीच सीधा मुकाबला तय है, जो सत्ता की चाबी तय करेगा।
- Written By: अपूर्वा नायक
पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pimpri Chinchwad News In Hindi: आगामी पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका (पीसीएमसी) चुनावों के लिए बिछी सियासी बिसात ने इस बार सबको चौंका दिया है। शहर के राजनीतिक गलियारों में गठबंधन को चर्चाओं पर विराम लगने के बाद अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है।
महानगर पालिका की कुल 128 सीटों में से 44 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है। गठबंधन न होने से पैदा हुई इस स्थिति ने मुकाबले को न केवल दिलचस्प बना दिया है, बल्कि दोनों दलों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगा दी है।
वोटों के ध्रुवीकरण का डर
पीसीएमसी के 32 प्रभागों में होने वाले इस चुनावी संग्राम में नामांकन वापसी के बाद समीकरण तेजी से बदले हैं। जानकारों का मानना है कि जहां पहले सहयोगी दल मिलकर वोट बैंक को एकजुट रखते थे, अब वहीं आमने-सामने होने से वोटों का भारी बंटवारा तय है। विशेषकर उन 44 सीटों पर, जहां कोई तीसरा प्रभावी उम्मीदवार नहीं है, वहां मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है। इन सीटों पर जीत का अंतर बहुत कम रहने की संभावना है, जिससे हर एक वोट की कीमत बढ़ गई है।
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विकास बनाम परिवर्तन का मुद्दा
भाजपा जहां पिछले पांच वर्षों के अपने विकास कार्यों, सड़कों के जाल और बुनियादी ढांचे के दम पर सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, वहीं एनसीपी ने स्थानीय मुद्दों जैसे पानी की किल्लत, ट्रैफिक जाम और कचरा प्रबंधन की विफलताओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है।
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सत्ता की चाबी किसके पास ?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये 44 सीटें ही तय करेगी कि पिंपरी-चिंचवड की सता की चाबी किसके हाथ लगेगी। गठबंधन के अभाव में निर्दलीय और छोटे दल भी ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाने की फिराक में हैं। फिलहाल, दोनों ही दलों ने इन सीटों पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। शहर का सियासी पारा अपने चरम पर है और मतदाताओं की खामोशी ने दिग्गजों की नींद उड़ा रखी है।
