
अजित पवार (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Ajit Pawar Film Industry Connection: महाराष्ट्र की राजनीतिक जगत से आज यानी 28 जनवरी को बेहद दुःखद खबर सामने आई है। राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का एक प्लेन क्रैश में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि यह हादसा उस समय हुआ जब वो बारामती में होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए आयोजित 5-6 महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होने जा रहे थे। सूत्रों के अनुसार, बारामती में लैंडिंग के दौरान उनका प्लेन क्रैश हो गया, जिससे वह दुनिया को अलविदा कह गए। ऐसे में अब उनके निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है।
वहीं अजित पवार का राजनीतिक करियर बेहद शानदार रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से भी गहरा कनेक्शन था। तो चलिए हम आपको बताते हैं…
दरअसल, अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के देवलाली में हुआ था। उनका परिवार भले ही फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा रहा हो, लेकिन अजित पवार का झुकाव शुरू से ही राजनीति की ओर था। उनके पिता अनंतराव पवार, दिग्गज फिल्म निर्देशक वी. शांताराम के साथ काम कर चुके थे और मुंबई के प्रसिद्ध राजकमल स्टूडियो में असिस्टेंट सिनेमैटोग्राफर के तौर पर कार्यरत थे। अनंतराव पवार चाहते थे कि उनका बेटा भी फिल्मों की दुनिया में नाम कमाए, लेकिन अजित पवार को न तो एक्टिंग में दिलचस्पी थी और न ही फिल्मी करियर में।
अजित पवार हमेशा से जनसेवा और सियासत से प्रभावित रहे। यही वजह रही कि उन्होंने अपने चाचा शरद पवार को अपना राजनीतिक आदर्श माना और उनकी राह पर चलते हुए साल 1982 में राजनीति में कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के लिए काम किया और धीरे-धीरे महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी पहचान बनानी शुरू की।
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बाद में जब शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का गठन किया, तो अजित पवार भी उनके साथ खड़े नजर आए। साल 2010 में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार के दौरान अजित पवार पहली बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
अपने करीब 45 साल के राजनीतिक करियर में अजित पवार एक बार सांसद और सात बार विधायक रह चुके हैं। समय के साथ उन्होंने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बना ली। हालांकि, साल 2022 में उनके और शरद पवार के रिश्तों में खटास आई और 2023 में अजित पवार ने एनसीपी की कमान अपने हाथ में ले ली। इसके बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया।






