
अबू सलेम (सोर्स: सोशल मीडिया)
Abu Salem Emergency Parole: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को लगातार मिल रही परोल पर देशभर में चल रही बहस के बीच अब अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम भी सुर्खियों में आ गया है। भाई की मौत के बाद उसने इमरजेंसी परोल के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
रेप और हत्या के मामलों में दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को आठ साल में 15 बार परोल मिलने को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट का दोषी अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम भी परोल की मांग को लेकर चर्चा में आ गया है। अबू सलेम ने अपने बड़े भाई के निधन के बाद इमरजेंसी परोल की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
अबू सलेम ने हाईकोर्ट से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाने की अनुमति मांगी है। उसके बड़े भाई अबू हाकिम अंसारी का 14 नवंबर 2025 को निधन हो गया था। याचिका में सलेम ने उन्हें पिता समान बताते हुए कहा है कि वह 40वें दिन की रस्में, कुरान ख्वानी, कब्रिस्तान में दुआ और परिवार से मिलने के लिए परोल चाहता है।
न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम सी. चांडक की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मुस्लिम परंपरा के अनुसार 40 दिनों की अवधि पहले ही पूरी हो चुकी है। इस पर सलेम की ओर से पेश अधिवक्ता फरहाना शाह ने दलील दी कि याचिका समय पर दायर की गई थी, लेकिन शीतकालीन अवकाश के कारण उस पर सुनवाई नहीं हो सकी।
अबू सलेम ने याचिका में बताया कि उसके भाई की तबीयत पिछले तीन महीनों से गंभीर थी और उसने जेल अधीक्षक से नियमित परोल की प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध किया था, लेकिन फैसला आने से पहले ही भाई का निधन हो गया। इसके बाद उसने इमरजेंसी परोल के लिए आवेदन किया, जिसे जेल अधिकारियों ने खारिज कर दिया।
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सलेम ने 1 दिसंबर को एडीजीपी के समक्ष अपील की थी, जहां उसे एस्कॉर्ट पार्टी के साथ जाने की अनुमति दी गई। हालांकि लाखों रुपये के एस्कॉर्ट खर्च को वह वहन नहीं कर सका। डीआईजी प्रिजन ने भी उसका आवेदन खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि वह फ्लाइट रिस्क है और कोई उपयुक्त जमानतदार उपलब्ध नहीं है।
अबू सलेम ने अदालत को बताया कि 2009 और 2011 में उसकी मां और खाला के निधन पर उसे परोल दी गई थी और उसने समय पर जेल में आत्मसमर्पण किया था। फिलहाल वह 2005 से नासिक सेंट्रल जेल में बंद है।
अबू सलेम को 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट और 1995 में बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामलों में दोषी ठहराया गया था। पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के बाद उसकी उम्रकैद की सजा को 25 साल में बदला गया। उसने हाल ही में यह स्पष्ट करने के लिए भी याचिका दायर की है कि उसकी सजा की अवधि कब पूरी होगी, जिस पर अभी सुनवाई बाकी है।






