छोटे दलों को मिटाने की हो रही साजिश, संघ-भाजपा पर प्रकाश आंबेडकर का प्रहार

Prakash Ambedkar: नागपुर में प्रकाश आंबेडकर ने संघ और भाजपा पर छोटे दलों को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाते हुए मतदाताओं को लोकतंत्र के खतरे के प्रति आगाह किया।
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Prakash Ambedkar:नागपुर में प्रकाश आंबेडकर (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nagpur Political News: वंचित बहुजन आघाडी के प्रमुख एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि देश में छोटे और बड़े राजनीतिक दलों के अस्तित्व को समाप्त करने की एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। उन्होंने मतदाताओं को “लोकतंत्र के खतरे” के प्रति आगाह किया।

आंबेडकर ने कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह से निर्विरोध चुनाव और राजनीतिक गठबंधन सामने आ रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि भाजपा अन्य दलों को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक चर्चाओं और गठबंधनों के दौरान दबाव और ब्लैकमेलिंग का खेल तेजी से बढ़ा है।

लोकतंत्र को खतरा

प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि यदि राजनीतिक दल ही नहीं बचेंगे, तो जनता की समस्याओं को उठाने वाला कोई नहीं रहेगा। उन्होंने इसे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा वर्णित “ग्रामर ऑफ अनार्की” यानी अराजकता के व्याकरण की ओर बढ़ता कदम बताया। उन्होंने नागपुर के मतदाताओं से अपील की कि लोकतंत्र को बचाने के लिए भाजपा को वोट न दें।

दो महीने में युद्ध की स्थिति का दावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आंबेडकर ने दावा किया कि देश की विदेश नीति पूरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ बढ़ते तनाव के चलते देश युद्ध की कगार पर खड़ा है। आंबेडकर ने आरोप लगाया कि चीन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री कार्यालय और सेना की भूमिका में विरोधाभास दिखाई देता है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

रिलायंस और रूसी तेल का मुद्दा

आंबेडकर ने आरोप लगाया कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से होने वाला लगभग 44 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक मुनाफा रिलायंस कंपनी को जा रहा है। उनके अनुसार, इसी कारोबारी समीकरण के कारण वैश्विक स्तर पर भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभावित हो रहे हैं।

मेट्रो का घाटा और मनपा पर बोझ

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार अगले पांच वर्षों में मेट्रो की जिम्मेदारी महानगर पालिका को सौंपी जाएगी। वर्तमान में मेट्रो लगभग 1,750 करोड़ रुपये के घाटे में है। यदि यह जिम्मेदारी पहले से ही आर्थिक संकट झेल रही मनपा पर डाली गई, तो शहर का विकास पूरी तरह ठप हो सकता है।

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