
टीईटी पेपर लीक (सौजन्य-सोशल मीडिया)
TET Paper Leak Bihar connection: टीईटी परीक्षा पेपर लीक मामले में पुलिस जांच में पांच परप्रांतीय संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। बिहार के रितेश कुमार के साथ-साथ ललित कुमार, सलाम, मोहम्मद असलम और एक अन्य का इसमें शामिल होना पता चला है। इन पांचों की तलाश तेज कर दी गई है और मध्यरात्रि में कोल्हापूर पुलिस का एक विशेष दस्ता बिहार रवाना हो गया।
साथ ही कोल्हापूर में प्रश्नपत्र हासिल करने की कोशिश करने वालों का भी संदिग्धों के कॉल डिटेल्स के आधार पर पता लगाया जा रहा है। गौरतलब है कि कागल तहसील के सोनगे के एक फर्नीचर मॉल में परीक्षार्थियों को टीईटी का पेपर देने के लिए बुलाया गया था, तभी पुलिस ने छापा मारकर कार्रवाई की थी। इस मामले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि सात अन्य अभी फरार हैं।
इनमें से पांच संदिग्ध परप्रांतीय हैं और प्रारंभिक जांच में पता चला है कि उन्होंने पेपर छपाई के स्थान से ही लीक करके सप्लाई किया था। मामले का मुख्य आरोपी करहाड़ निवासी महेश गायकवाड (40) पुलिस हिरासत में है और उससे मिल रही जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।
जांच अधिकारी उपअधीक्षक सुजीतकुमार क्षीरसागर पूरे दिन मुरगूड में डेरा डाले रहे और गिरफ्तार संदिग्धों से अधिक से अधिक जानकारी जुटाने का काम कर रहे हैं। इसी बीच मुरगूड पुलिस का दल और स्थानीय अपराध शाखा की टीमें पुणे-मुंबई सहित विभिन्न स्थानों पर बाकी संदिग्धों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं।
मुख्य संदिग्ध महेश गायकवाड मूल रूप से सातारा जिले का रहने वाला है। उसे 2023 से ही पेपर लीक करने का यह रैकेट चलाने का संदेह है। क्या उसने सातारा जिले में भी इसी तरह पेपर लीक किए हैं, इसकी जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने सातारा के स्थानीय पुलिस से संपर्क किया है। साथ ही सातारा और कोल्हापूर के अलावा राज्य के किन-किन जिलों में महेश गायकवाड के संपर्क थे, इसकी भी गहन पड़ताल की जा रही है।
यह भी पढ़ें – बायोटेक का केंद्र बनेगा महाराष्ट्र, सरकार का अब तक का सबसे बड़ा मेगा प्लान लॉन्च, दुनिया की होगी नजर
टीईटी पेपर लीक मामले से जुड़े होने के कारण राधानगरी तहसील के एक कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य तथा बिद्री के एक क्लॉक ऑवर बेसिस (सीएचबी) प्रोफेसर को संबंधित संस्थानों ने तुरंत निलंबित कर दिया है। विभागीय उच्च शिक्षा उपसंचालक ने पेपर लीक प्रकरण को लेकर सभी संबंधित संस्थाओं को पत्र भेजा था। उसकी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संस्थाओं ने फौरन निलंबन की कार्रवाई की है।
छापेमारी के दौरान पुलिस को करीब 180 विद्यार्थियों की सूची हाथ लगी थी। साथ ही पेपर बेचने वाले शिक्षकों और एजेंटों के कॉल रिकॉर्ड के आधार पर ‘लाभार्थियों’ (जिन्हें पेपर मिला) की जानकारी जुटाई जा रही है। इनसे फोन पर संपर्क करके पेपर की जानकारी दी गई थी या नहीं, और उनसे कितने पैसे वसूले गए इसकी भी गहन जांच की जा रही है।






