निजी उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बड़ी राहत (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Kolhapur News: राज्य सरकार ने निजी प्रबंधन के अंतर्गत संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 6 से 8) को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। अब ऐसे विद्यालयों में, जहां छात्र संख्या 20 से कम है, वहां भी न्यूनतम एक शिक्षक की मंजूरी दी जाएगी। यह निर्णय इस वर्ष की अनुमोदन प्रक्रिया के तहत लिया गया है। संबंधित आदेश कक्ष अधिकारी विशाल लोहार ने जारी किया। इस बारे में जानकारी महाराष्ट्र राज्य मान्यताप्राप्त निजी प्राथमिक शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ के जिला प्रवक्ता सुरेंद्र टिके तथा शहर प्रवक्ता अरविंद चव्हाण ने दी।
गौरतलब है कि शिक्षण विभाग ने दिनांक 10 मार्च 2024 को जारी शासनादेश में केवल स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के अधीन आने वाले विद्यालयों को यह सुविधा दी थी। उस आदेश के अनुसार यदि किसी उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या 20 से कम भी हो, तो भी न्यूनतम एक शिक्षक की स्वीकृति अनिवार्य रूप से दी जानी थी। किंतु यह आदेश निजी प्रबंधन के विद्यालयों पर लागू नहीं था, जिससे भारी असंतोष व्याप्त था।
इस विसंगति को दूर करने के लिए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने लगातार प्रयास किए। पुणे विभाग के शिक्षक विधायक जयंत आसगावकर और महासंघ के राज्य सचिव राजेंद्र कोरे ने राज्य के शिक्षण संचालक शरद गोसावी से विस्तृत चर्चा कर इस मामले को गंभीरता से उठाया। साथ ही, शासन को निवेदन प्रस्तुत कर यह मांग रखी गई कि 10 मार्च के आदेश को निजी विद्यालयों पर भी लागू किया जाए।
शासन ने इस मांग को संज्ञान में लेते हुए प्राथमिक शिक्षण विभाग के माध्यम से प्रस्ताव सरकार तक पहुंचाया। इसके आधार पर नया आदेश निर्गमित किया गया, जिसके अनुसार शैक्षणिक वर्ष 2024-25 की अनुमोदन प्रक्रिया में निजी प्रबंधन के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को भी अनुदानित पदों की मंजूरी दी जाएगी।
राज्य सचिव राजेंद्र कोरे ने कहा, “यह निर्णय राज्य के हजारों निजी विद्यालयों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे अतिरिक्त ठहरने वाले शिक्षकों की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी और विद्यालयों में शिक्षण प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित रूप से संचालित हो सकेगी।”अनुमोदन (संचमान्यता) की प्रक्रिया का उद्देश्य विद्यालयों में विद्यार्थियों और वर्गों की संख्या के आधार पर आवश्यक शिक्षकों की संख्या निर्धारित करना है। यह प्रक्रिया हर वर्ष जुलाई के अंत तक विद्यार्थियों की कुल संख्या और शिक्षकों के साप्ताहिक कार्यभार (औसतन 18 घंटे) को ध्यान में रखकर की जाती है। तत्पश्चात अगस्त में अंतिम मंजूरी दी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से जहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी, वहीं शिक्षकों का कार्यभार भी समान रूप से विभाजित होगा। प्रशासनिक कार्यकुशलता में वृद्धि होगी और निजी विद्यालय व्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी।