हैदराबाद इनाम जमीन विवाद पर बड़ी राहत, महाराष्ट्र मुद्रांक अधिनियम में संशोधन किया प्रस्तावित

Hyderabad Inam Act amendment: महाराष्ट्र सरकार ने हैदराबाद इनाम रद्दीकरण अधिनियम 1954 और महाराष्ट्र मुद्रांक अधिनियम 1958 में संशोधन हेतु दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए।
Hyderabad Inam Act amendment: महाराष्ट्र सरकार ने हैदराबाद इनाम रद्दीकरण अधिनियम 1954 और महाराष्ट्र मुद्रांक अधिनियम 1958 में संशोधन हेतु दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए।
चंद्रशेखर बावनकुले (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Winter Session Updates: महाराष्ट्र विधानमंडल में हैदराबाद इनामों और रोक अनुदानों को रद्द करने वाले अधिनियम, 1954 में आगे और संशोधन करने के लिए एक महत्वपूर्ण विधेयक, विधानसभा विधेयक क्रमांक 101, 2025 पेश किया गया है। विधेयक (अधिनियम, 1954) महाराष्ट्र राज्य के हैदराबाद क्षेत्र में इनामों और नकद अनुदानों को रद्द करने के लिए प्रावधान करता है।

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य जनहित को ध्यान में रखते हुए, उन भोगवटधारकों को बड़ी राहत प्रदान करना है, जिन्होंने नई और अविभाज्य शर्तों पर धारित 'मीरेश' इनाम भूमि को अनधिकृत रूप से निवास प्रयोजनों के लिए हस्तांतरित किया है। प्रमुख संशोधन और राहत राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक के तहत, अधिनियम 1954 की धारा 6 के उप-खंड (3) में संशोधन प्रस्तावित किया गया है।

महाराष्ट्र मुद्रांक अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित

महाराष्ट्र मुख्य सुधार और कारण मुद्रांक अधिनियम, 1958 में आगे सुधार करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र विधानसभा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण विधेयक (विधानसभा विधेयक क्रमांक 103) प्रस्तुत किया गया है। इस विधेयक को महाराष्ट्र मुद्रांक (दूसरी सुधारणा) अधिनियम, 2025 कहा जाएगा।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा प्रस्तुत इस विधायी कार्य का मुख्य उद्देश्य मुद्रांक शुल्क (Stamp Duty) संबंधी मामलों में उच्च न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम करना और विवादों को शीघ्र निपटाना है।

मुख्य सुधार और कारण

वर्तमान में महाराष्ट्र मुद्रांक अधिनियम (1958 का 60) की धारा 53 (11) के तहत जिला कलेक्टरों के आदेशों से व्यथित कोई भी व्यक्ति मुख्य नियंत्रक महसूल प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर कर सकता था और प्राधिकारी द्वारा दिए गए आदेश अंतिम होते थे। इन अंतिम आदेशों को केवल उच्च न्यायालय में रिट क्षेत्राधिकार के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती थी।

इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में याचिकाएं उच्च न्यायालयों में दायर की जाती रही हैं जिससे न्यायालयों पर भार बचढ़ गया है। इसके अलावा विवादों के लंबे समय तक खिंचने के कारण सरकार का भारी राजस्व भी लंबी अवधि के लिए अटक जाता है। इन समस्याओं को हल करने के लिए अधिनियम में संशोधन किया है।

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