पोला त्योहार 2024 (सौ.सोशल मीडिया)
जलगांव। हिंदू धर्म के तीज त्योहारों में कई व्रत और त्योहार है जिसमें आने वाले दिन सोमवार यानि 2 सितंबर को पारंपरिक त्योहार पोला मनाया जाएगा। जो देश के कई हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता हैं तो वहीं पर महाराष्ट्र में इसकी धूम बेहद खास होती है। राज्य की रावेर तहसील के ग्रामीण इलाके मे पोला त्यौहार को बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसलिए रावेर शहर मे बैलों का साज व सामान सहित मालीघोरी मिट्टी से बने बैल अलग-अलग रंगों के साथ डिजाइन में एवं मिट्टी से बने पोला और खिलौने जैसे चूल्हा, मटका, कढाई, गंजी समेत अन्य प्रकार से बने मिट्टी के बर्तन बिकने के लिए दुकानें लगनी शुरू हो गईं हैं। रावेर तहसील के खानापूर के रामभाऊ भार्ते ने बताया कि पोला त्योहार पर मिट्टी के बैल जोडी को कीमत 40,60,100 रुपये में बिक रहे हैं।
आपको बताते चलें कि, रावेर शहर तहसील अपनी संस्कृति और त्योहारों के लिए मशहूर है। प्रमुख त्योहारों में से एक त्योहार है बैल पोला, जिसे सोमोशीकी अमावस्या को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।इसमें अन्नदाता के साथी बैल को सजाकर विशेष पूजा की जाती है। महाराष्ट्र राज्य कृषि प्रधान राज्य है इसलिए यहां कृषि कार्य में बैल का विशेष योगदान होता है, जहां बुआई से लेकर बियासी तक किसान बैल का उपयोग करते हैं। मिट्टी के बैल की पूजा करने के बाद बच्चे मिट्टी के बर्तनों और मिट्टी के बैलों के साथ खेलते हैं। पोला त्योहार मूल रूप से खेती-किसानी से जुड़ा पर्व है। इस त्योहार में बैलों को विशेष रूप से सजाया जाता है। उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। घरों में बच्चे मिट्टी से बने नंदीबैल और बर्तनों के खिलौनों से खेलते हैं।
घरों में पुरण पूली, खुरमी, गुड़-चीला, गुलगुले, भजिया जैसे पकवान तैयार किए जाते हैं और उत्सव मनाया जाता है। तहसील मे कुछ गांवों मे बैलों की दौड़ भी इस अवसर पर आयोजित की जाती है। पोला के साथ साथ तहसील क्षेत्र में तीजा (हरतालिका तीज) की विशिष्ट परंपरा है। महिलाएं तीजा मनाने ससुराल से मायके आती हैं। तीजा मनाने के लिए बेटियों को पिता या भाई ससुराल से लेकर लाते हैं। रावेर शहर के निवासी वसंत भट ने बताया कि पोला का त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ रावेर इसमें अन्नदाता के साथी बैल को सजाकर विशेष पूजा की जाती है।
पोला के लिए सजने लगे बाजार (सौ. नवभारत डिजिटल)
महाराष्ट्र राज्य कृषि प्रधान राज्य है इसलिए यहां कृषि कार्य में बैल का विशेष योगदान होता है, जहां बुआई से लेकर बियासी तक किसान बैल का उपयोग करते हैं। मिट्टी के बैल की पूजा करने के बाद बच्चे मिट्टी के बर्तनों और मिट्टी के बैलों के साथ खेलते हैं। पोला त्योहार मूल रूप से खेती-किसानी से जुड़ा पर्व है। इस त्योहार में बैलों को विशेष रूप से सजाया जाता है। उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। घरों में बच्चे मिट्टी से बने नंदीबैल और बर्तनों के खिलौनों से खेलते हैं। घरों में पुरण पूली, खुरमी, गुड़-चीला, गुलगुले, भजिया जैसे पकवान तैयार किए जाते हैं और उत्सव मनाया जाता है।
तहसील मे कुछ गांवों मे बैलों की दौड़ भी इस अवसर पर आयोजित की जाती है। पोला के साथ साथ तहसील क्षेत्र में तीजा (हरतालिका तीज) की विशिष्ट परंपरा है। महिलाएं तीजा मनाने ससुराल से मायके आती हैं। तीजा मनाने के लिए बेटियों को पिता या भाई ससुराल से लेकर लाते हैं। रावेर शहर के निवासी वसंत भट ने बताया कि पोला का त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ रावेर शहर ओर क्षेत्र में मनाया जाता है। रेत से महादेव का पिंड यांनी पार्थिव भी बनाते हैं तहसील मे बाजार में बैलो के विभिन्ना प्रकार के रंग-बिरंगे साज समान और मिट्टी के बैल से रावेर का बाजार में सज गए हैं।