महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: शहीद पुलिसकर्मियों के वारिसों को मिली सीधी नियुक्ति, जारी हुआ आदेश

Maharashtra Govt Jobs: नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए संतोष घाग और हरिदास सयाम के परिवारों को महाराष्ट्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। वारिसों को पुलिस उपनिरीक्षक (PSI) पद पर मिली सीधी नियुक्ति।
Maharashtra Police API to PI Promotion List
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Govt Direct Recruitment Martyr Police Families: नक्सलवाद के खिलाफ जंग में अपनी जान की बाजी लगाने वाले वीर जवानों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सरकार ने उन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवारों के लिए 'राहत पैकेज' के तहत सीधी सरकारी नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं, जिन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में वीरगति प्राप्त की थी।

इन परिवारों को मिला सम्मान

गृह विभाग द्वारा गुरुवार को जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, शहीद पुलिस उपनिरीक्षक (PSI) संतोष महिपत घाग और शहीद पुलिस हवलदार हरिदास चिंतामण सयाम के वारिसों को अनुकंपा के आधार पर पुलिस उपनिरीक्षक (गट-ब, अराजपत्रित) के पद पर सीधी नियुक्ति प्रदान की गई है।

2009 के प्रावधान का मिला लाभ

यह नियुक्तियां वर्ष 2009 के शासन निर्णय (GR) के तहत की गई हैं। इस प्रावधान में स्पष्ट उल्लेख है कि नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद होने वाले कर्मियों के वारिसों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर गट-अ और गट-ब संवर्ग में सीधे नियुक्त किया जा सकता है। इसी के तहत विराज संतोष घाग और विकास हरिदास सयाम की योग्यता को जांचने के बाद उन्हें यह विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गड़चिरोली में सेवा की अनिवार्य शर्त

हालांकि, इस गौरवपूर्ण नियुक्ति के साथ सरकार ने एक विशेष शर्त भी जोड़ी है। नवनियुक्त अधिकारियों को गड़चिरोली जैसे चुनौतीपूर्ण और विशेष नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देनी होंगी। यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि वे उस क्षेत्र की जमीनी हकीकत को समझ सकें जहां उनके पिताओं ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।

पुलिस बल में खुशी की लहर

महाराष्ट्र सरकार का यह कदम न केवल शहीद परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि पूरे पुलिस विभाग के मनोबल को बढ़ाने वाला है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, "कठिन परिस्थितियों में कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले जवानों के परिवारों की जिम्मेदारी उठाना राज्य का नैतिक कर्तव्य है। यह निर्णय शहीदों के बलिदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।"

इस फैसले से यह संदेश गया है कि सरकार अपने वीर जवानों के परिवारों को कभी अकेला नहीं छोड़ती। शहीद परिवारों को न्याय मिलने की इस पहल की हर तरफ सराहना हो रही है।

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