'कानून नहीं, प्रशासनिक लापरवाही से अटके मामले'; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार

Allahabad High Court:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2009 से लंबित एक मामले की सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव (विधि) को 27 जुलाई को उपस्थित होने का निर्देश दिया।
Allahabad High Court Pulls Up UP Government Over Delay in Pending Cases
इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Allahabad High Court Reprimand UP Government: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्षों से लंबित पड़े मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश शासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकल पीठ ने उदयभान सिंह से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायालय में लंबित मामलों के पीछे कानूनी जटिलताएं नहीं, बल्कि राज्य प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता प्रमुख कारण है।

कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को लगाई फटकार

कोर्ट ने टिप्पणी की कि संबंधित याचिका वर्ष 2009 से लंबित है। इतने लंबे समय तक मामले का निस्तारण न हो पाने का कारण कानून की पेचीदगियां नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों द्वारा समय पर आवश्यक अभिलेख और रिकॉर्ड उपलब्ध न कराना है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य कई बार सामने आया कि राज्य के अधिकारी पूर्ण और प्रासंगिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में विफल रहे, जिसके कारण अदालत को बार-बार सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।

विधि विभाग के प्रमुख सचिव को उपस्थित होने का निर्देश

न्यायालय ने कहा कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। विभिन्न मामलों में अधूरे, त्रुटिपूर्ण अथवा विलंब से अभिलेख प्रस्तुत किए जाने की प्रवृत्ति देखी गई है। इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि न्याय प्रशासन की प्रभावशीलता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक उदासीनता करार देते हुए कहा कि ऐसी कार्यशैली न्याय पाने के संवैधानिक अधिकार और त्वरित न्याय की अवधारणा के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शासन के विधि विभाग के प्रमुख सचिव को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही उनसे यह बताने को कहा गया है कि सरकारी अभिलेखों के उचित रखरखाव, संरक्षण और समयबद्ध प्रस्तुतीकरण के लिए शासन स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि न्यायिक कार्यवाही बिना अनावश्यक देरी के आगे बढ़ सके।

कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि प्रशासनिक स्तर पर सुधार नहीं हुआ तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है, जहां शासन से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई है।

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