
सीएम देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
CM Fadnavis Initiative: दिव्यांग और वंचित युवाओं के जीवन में स्थायी बदलाव लाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर राज्य सरकार और गड़चिरोली जिला प्रशासन ने दक्षिण एशिया की प्रतिष्ठित संस्था ‘यूथ फॉर जॉब्स’ के साथ भागीदारी की है। बीते छह महीनों में यूडीआईडी (दिव्यांग पहचान पत्र) नोंदणी का 100 प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के साथ ही 28 युवाओं को रोजगार और 3 युवाओं को उद्यमी बनने में सफलता मिली है।
‘यूथ फॉर जॉब्स ग्रासरूट अकादमी’ के माध्यम से चलाए गए इस कार्यक्रम ने जिले में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव दर्शाए हैं। इस अवधि में 290 युवाओं को प्रेरित कर कार्यक्रम में शामिल किया गया, जिनमें से 68 युवाओं ने कौशल प्रशिक्षण पूरा किया। इन प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि 28 युवाओं को नौकरी मिली, जिससे उनका वार्षिक औसत आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।ॉ
इसी के साथ, सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित 3 युवाओं ने ‘रंग दे’ संस्था से 1,20,000 का कर्ज लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया। इनके वार्षिक औसत आय का स्तर बढ़कर लगभग 3 लाख तक पहुंचा है। इस रोजगार व उद्यम सहायता से कुल 33 परिवारों पर प्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
रोजगार और उद्योग के क्षेत्र में व्यापक प्रभाव के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं ने सक्रिय सहयोग दिया। ‘यूथ फॉर जॉब्स’ और जिला प्रशासन के बीच एमओयू (MoU) किया गया, जिसके बाद रोजगार मेलों और यूडीआईडी नोंदणी अभियान को गति मिली।
इसी प्रयास के तहत 20 जून 2025 को पंचायत समिति सभागृह, गड़चिरोली में ‘दिव्यांग समारोह’ आयोजित किया गया, जिसमें 42 दिव्यांगजन व उनके पालक उपस्थित थे। उन्हें दिव्यांग अधिकार, यूडीआईडी नोंदणी और करियर मार्गदर्शन की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
शामिल गांव: 33
शामिल तहसीलें: 3
शामिल सरकारी विभाग: 8
स्वयंसेवी संस्थाएं: 3
कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से अवसर पाने वाले युवाओं की कहानियां प्रेरणादायक हैं। पंकज डोनाडकर (आयु 20 वर्ष)40 प्रश अस्थि-अपंगत्व वाले पंकज 12वीं उत्तीर्ण होने के बावजूद नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे थे। ‘यूथ फॉर जॉब्स’ के प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ने के बाद उन्हें गड़चिरोली के ‘लकी ऑटोमोबाइल्स’ में कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में 1,08,000 वार्षिक मानधन पर नौकरी मिली।
यह भी पढ़ें – HRSP प्लेटों के लिए 10 दिन शेष, वाहन चालकों में भागमभाग, 3 लाख वाहनों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
आज वह अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रहे हैं। प्रभाकर चांदीकर (आयु 59 वर्ष) 50 फीसदी कुष्ठरोगजन्य अपंगत्व होने के बावजूद प्रभाकर ने सूक्ष्म उद्यम प्रशिक्षण और 40,000 कर्ज सहायता के आधार पर अपने ‘भाम भोले वस्त्रालय’ कपड़ा व्यवसाय को नई ऊंचाई दी। उनका वार्षिक आय बढ़कर 4,20,000 तक पहुंच गया है। दिव्यांग व्यक्तियों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में जिले की यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायी है।






